योग सम्बन्धी भ्रातियां एवं परंपरागत शैलियां(Yoga related fraternities and traditional styles)

योग सम्बन्धी भ्रातियों को दूर करना :

  • कई लोगों के लिए योग का अर्थ हठ योग एवं आसनों तक सीमित है।
  • आम तौर पर योग को स्‍वास्‍थ्‍य एवं फिटनेस के लिए थिरेपी या व्‍यायाम की पद्धति के रूप में समझा जाता है।
  • योग किसी खास धर्म, आस्‍था पद्धति या समुदाय के मुताबिक नहीं चलता है; इसे सदैव अंतरतम की सेहत के लिए कला के रूप में देखा गया है।
  • जो कोई भी तल्‍लीनता के साथ योग करता है वह इसके लाभ प्राप्‍त कर सकता है, उसका धर्म, जाति या संस्‍कृति जो भी हो।

योग की परंपरागत शैलियां :

  • योग के ये भिन्‍न – भिन्‍न दर्शन, परंपराएं, वंशावली तथा गुरू – शिष्‍य परंपराएं योग की ये भिन्‍न – भिन्‍न परंपरागत शैलियों के उद्भव का मार्ग प्रशस्‍त करती हैं, उदाहरण के लिए,
    • ज्ञान योग,
    • भक्ति योग,
    • कर्म योग,
    • ध्‍यान योग,
    • पतंजलि योग,
    • कुंडलिनी योग,
    • हठ योग,
    • मंत्र योग,
    • लय योग,
    • राज योग,
    • जैन योग,
    • बुद्ध योग आदि।

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