रस्सी के सिरे सुरक्षित करना (Whipping)

रस्सी की जानकारी

रस्सी, स्काउट/गाइड का एक अच्छी मित्र है। अतः उसका सम्पूर्ण जानकारी होना उनके लिये अत्यावश्यक है। रस्सी-सूत, जूट, नारियल, नायलॉन, तार, टेरिलीन, सन आदि की बनती है। किन्तु सन की रस्सी मजबूत व कोमल होती है।

रस्सी को फीट या फेदम में नापा जाता है। रस्सी की परिधि से उसकी मोटाई 3″ तीन ईंच आंकी जाती है अर्थात् मोटी रस्सी वह कहलाती है जिसकी परिधि 3″ और व्यास 1” हो।।” से कम की परिधि की रस्सी को लड़ी(String or Cord) कहा जाता है। 3′ की रस्सी की मजबूती (Safe Working Load /SwL) होगी 2×3-18 CWTS प्राकृतिक रेसों (Natural Fibres) को किसी एक दिशा में बट देने पर धागा (Thread) तथा धागों को विपरीत दिशा में बट देने से लड़ें (Stand) बनती हैं और लड़ों को बटकर रस्सी (Rope) बनती है।

साधारणतया रस्सी तीन प्रकार की होती है।

  • 1. दुलड़ी रस्सी (Double laid) दो लड़ें बट कर।
  • 2. तिलड़ी रस्सी (Howser) तीन लड़ें बट कर।
  • 3. चौलड़ी रस्सी (Shround) चार लड़ें एक साथ बटकर

किसी रस्सी के दो सिरे होते हैं-

चुस्त सिरा (Running end) तथा सुस्त भाग (Standing Part) ।

चुस्त सिरा क्रियाशील रहता है जबकि सुस्त भाग सहयोग करता है। रस्सी को किसी स्थान पर मोड़ा जाना मोड़ (Bight) कहलाता है। यदि ‘बाइट’ के दोनों सिरे मिला दिये जायें तो उसे फन्दा (Loop) कहा जाता है। जब चुस्त सिरा ऊपर हो तो ऊपरी फन्दा (Over hand loop) और चुस्त सिरा जब नीचे की ओर हो तो निचला फन्दा (Underhand loop) कहलाता है।

प्रत्येक स्काउट गाइड अपने पास एक 3 मीटर की, 3/4 इंच मोटी रस्सी (डोरी) रखता है, जिसे जीवन रक्षक डोरी (Life line) कहा जाता है। इससे वे विविध काय लेता है।

मनुष्य प्राचीन काल से ही अनेक गाँठ, फाँस, साँठ, बन्धन व जकड़नों का प्रयोग करता आया है। स्काउट गाइड को भी अपने जीवन में उक्त गाँठ, फाँस, साँठ, बन्धन व जकड़नों की आवश्यकता पड़ती रहती है। अतः इन्हें शीघ्रता व सफाई से अल्पावधि में लगा लेने व खोलने का अभ्यास करना अति आवश्यक है।
एक अच्छी गाँठ वह है जो शीघ्रता से लग जाय और खोलने पर तुरन्त खुल जाय।


गाँठों का उपयोग

  • एक ही रस्सी के दोनों सिरों को एक साथ जोड़ना।
  • दो रस्सियों को एक साथ जोड़ना।
  • किसी रस्सी को किसी खम्भे या छल्ले पर बांधना।
  • रस्सी को छोटा करना।
  • रस्सी के अन्तिम सिरे पर रोक लगाना।

रस्सी की सम्भाल में सावधनियाँ

  • रस्सी को खुली नहीं छोड़ना चाहिए। उसके सिरों को किसी भी विधि से सुरक्षित (Whipped) कर लेना चाहिए।
  • भीगी रस्सी को कभी भी गोदाम में यों हीं नहीं रख देना चाहिए वरन् उसे छाया में सुखाकर ही रखना चाहिए। तेज धूप में कदापि नहीं सुखाना चाहिए।
  • रस्सी को नमी युक्त कमरे में कदापि नहीं रखना चाहिए और न ही अधिक गर्म कमरे में।
  • नम रस्सी को शीघ्रता से नहीं सुखाना चाहिए।
  • रस्सी में गाँठे लगी व ऐंठन नहीं छोड़नी चाहिए।
  • रस्सी को ढेर लगाकर भूमि पर नहीं रखना चाहिए वरन् ‘कॉइल’ कर लटका कर रखना चाहिए।

रस्सी के सिरे सुरक्षित करना (Whipping)

रस्सी को काटते ही उसकी लड़ें खुल जाती है जिससे उसका कुछ भाग बेकार हो जाता है। इसलिये रस्सी के सिरों को सुरक्षित करना अत्यावश्यक है। सिरों पर गाँठ का प्रयोग न कर किसी विधि से उसे (Whip) करना चाहिए। नायलॉन व टेरिलीन की रस्सी को काटने से पूर्व आँच में पिघलाकर सुरक्षित कर लेना चाहिए। सूत, जूट, नारियल, सन आदि को सुरक्षित करने की निम्नलिखित विधियां प्रचलित हैं:-

1. जिस सिरे को सुरक्षित करना हो उसके ऊपर एक मजबूत मोटा धागा लेकर एक लूप बना लें और धागे के दूसरे सिरे को आवश्यकतानुसार लपेट लें। अन्त में इस सिरे को लूप में डालकर उसे खीच लें। शेष धागा काट दें।

2. जिस सिरे को सुरक्षित किया जाना है उस पर धागे से कस कर डॉक्टरी गाँठ लगा दें। दूसरी डॉक्टरी गाँठ पहली के विपरीत लगायें। इस प्रकार रस्सी के आगे पीछे कई गाँठे लगाकर शेष धागा काट लें।

3. रस्सी की लड़ों को थोड़ा-सा खोलकर उनमें से एक लड़ पर धागे का मोड़ (Bight) बनाकर डाल दें। अब सभी लड़ों को साथ लेकर धागे के बड़े सिरे से उनमें तीन-चार बार कसकर लपेटे लगा दें। अन्त में इसी धागे को लूप में डाल दें तथा पहले सिरे में कस दें। शेष धागा काट दें।

4. क्राउन नॉट से भी रस्सी के सिरे सुरक्षित किये जा सकते हैं।

5. सादी गाँठ तथा क्राउन गाँठ से भी अल्पकाल के लिये सिरे सुरक्षित किये जा सकते हैं।

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