ड्रेसिंग (Dressing) क्या है ?

ड्रेसिंग (Dressing) ड्रेसिंग वह आवरण (Covering) है जिससे घाव या आहत अंग ढका जाता है। इससे खून का बहना, घाव का फैलाव तथा रोगाणुओं से रक्षा की जाती है।
ड्रेसिंग दो प्रकार से की जा सकती है- सूखी (Dry)और नम (Wet)।
सूखी ड्रेसिंग का तात्पर्य है कि जब घाव खुला हो- उस पर रोगाणुमुक्त ड्रेसिंग (Sterilized Dressing) करनी हो, खुले या जले घाव या रक्त श्राव की स्थिति में सूखी ड्रेसिंग की जाती है। यह ड्रेसिंग रोगाणुमुक्त (Sterilised) मिलती है। यदि इस प्रकार की ड्रेसिंग उपलब्ध न हो तो किसी साफ सफेद कपड़े का प्रयोग करना चाहिए। इसके अभाव में किसी साफ रुमाल या स्कार्फ का प्रयोग करना चाहिए। ड्रेसिंग करने से पूर्व प्राथमिक चिकित्सक को अपने हाथों को रोगाणु रोधक घोल से अच्छी तरह धो लना चाहिए। इसके बाद ही रोगाणु रोधक घोल या लोशन से घाव साफ करना चाहिए। घाव के ऊपर ड्रेसिंग रख कर रुई से ढक कर पट्टी बांधनी चाहिए।
नम ड्रेसिंग को बन्द घाव पर प्रयुक्त किया जाता है। इसका प्रयोग खुले घाव पर कदापि न करें और न ही रोगाणुरोधक ड्रेसिंग का प्रयोग करें। इसमें ठण्डे पानी की या बर्फ की सेंक (Cold Compress) दी जाती है। बन्द घाव में टिंचर आयोडीन या टिंचर बैन्जोइन का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। आहत अग पर अन्तः रक्तश्राव या सूजन की स्थिति में नम ड्रेसिंग का प्रयोग किया जाना चाहिए। किसी स्वच्छ तौलिये, रुमाल या वस्त्र को पानी में भिगो कर उसे निचोड़कर घाव पर रखते रहना चाहिए.

कटने तथा खरोच का उपचार – प्राथमिक चिकित्सक को डिटोल या किसी
कीटाणु नाशक से अपने हाथ धोकर गाँज रखने के बाद उस पर पट्टी बांध
देनी चाहिए ताकि धूल, मक्खी व कीटाणुओं से बचाव हो।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply