मानचित्र बनाने की त्रिकोणी विधि

मानचित्र बनाने की त्रिकोणी विधि

इस विधि में चुम्बकीय कोण (बेयरिंग) ज्ञात कर लिये जाते है और दूरी को चैन या टेप से नाप लिया जाता है। जब दिशा और दूरी ज्ञात हो जाय तो मानचित्र बनाना सरल हो जाता है।
चुम्बकीय कोण (बेयरिंग) का तात्पर्य है किसी वस्तु का चुम्बकी उत्तर से उस वस्तु का घड़ी की दिशा में बना कोण।

कम्पास भूमापन में निम्न प्रक्रिया अपनायें:-

जिस क्षेत्र का मापन करना है उसका निरीक्षण कर एक कच्चा खाका बना लें।
कम्पास को ‘अ’ स्टेशन पर सैट कर लें। उसे क्षैतिज दिशा में समतल कर लें।
‘ब’ स्थान पर रेजिंग रॉड लगायें और उसका कोण ज्ञात कर लें।
‘अ’ स्थान पर विभिन्न वस्तुओं के कोण ज्ञात कर लें।
‘अ’ और ‘ब’ की दूरी को नाप लें और उसे एलोयन करें।
‘ब’ स्थान से भी ‘अ’ से ज्ञात किये गये ऑब्जेक्ट्स के कोण ज्ञात करें। ‘ब’ के कोण बैक वियरिंग कहलायेंगे।
यही प्रक्रिया ‘स’, ‘द’ आदि से भी अपनाते चलें।
‘अ’ और ‘ब’ केन्द्रों से लिये गये कोण और बीच की दूरी को कागज पर
प्लाटिंग करें। इनसे लिये गये कोणों के कटान बिन्दु अभीष्ट वस्तु (Object) की स्थिति होगी। यह प्रक्रिया आगे के केन्द्रों से भी चलें।

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