इन कविताओं को पढ़कर नर्सरी कक्षा की यादें ताज़ा हो जाएँगी

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Nursery class  poems.

 

मैं तो सो रही थी-

मैं तो सो रही थी,
मुझे बिल्ली ने जगाया,
बोली- म्याऊं, म्याऊं, म्याऊं,
मैं तो सो रही थी,
मुझे कुत्ते ने जगाया,
बोला- भौं, भौं, भौं,|
मैं तो सो रही थी,
मुझे चिड़िया नहीं जगाया,
बोली- चीं ,ची ,ची,|
मैं तो सो रही थी,
मुझे मुर्गे ने जगाया,
बोला –कुकड़ू – कु |
मैं तो सो रही थी,
मुझे कोयल ने जगाया,
बोली- कुहू, कुहू, कुहू |
मैं तो सो रही थी,
मुझे अम्मा ने जगाया,
बोली –उठ ,उठ, उठ|

गोल-

बोलो बच्चों क्या-क्या गोल?
सूरज गोल, चंदा गोल,
टन -टन करता घंटा गोल,
रोटी गोल, टोपी गोल,
चूड़ी गोल, बिंदी गोल,
गाड़ी के पहिए भी गोल,
सुन मेरी गुड़िया गोल- मटोल |

देखो और पहचानो-

अम्मा की साड़ी है लंबी |
श्याम की चोटी है लंबी |
झाड़ू लंबी, रस्सी लंबी |
अंगूठे से उंगली है लंबी |
दस डिब्बों की रेल है लंबी |
जिस पर दौड़े पटरी लंबी |
एक गली  से,सड़क है लंबी |
गुड़िया से, दीदी है लंबी |

गिनती का गीत और मेला-

एक चली बैलों की गाड़ी,
जूते हुए दो बैल अनाड़ी |
बैठी थी कुल तीन सवारी,
चार बजे से की तैयारी |
पांच मील पर लगा है मेला,
छ: दिन से है रेलमरेला |
साथ गांव के लोग हैं आते, \
आठ दिनों तक धूम मचाते |
नौ दिन तक है मेला चलता,
दसवें दिन फिर कुछ नहीं मिलता |

क्या -क्या काला –

इंजन काला, साइकिल काली,
दोनों की आवाज निराली |
इंजन करता,
छुक- छुक -छुक |
साइकिल करती,
किट- किट- किट |
कौआ काला, कोयल काली,
दोनों की आवाज निराली |
कौआ करता,कांव-कांव,
कोयल करती, कुहू -कुहू ,
गाते जाओ, रुकते क्यूं |
कुत्ता काला……….

क्या-क्या होता गोल –

गोल -गोल, गोल -गोल,
सूरज गोल, चंदा गोल,
सिक्का गोल, चक्का गोल,
और क्या -क्या होता गोल,
नहीं मालूम तो घूमो गोल |
गोल -गोल, गोल -गोल ,
अब रुक जाओ, बैठो गोल|
गोल – गोल, गोल- गोल ,
गहरा कुआं, गोल- गोल,
रात का चंदा, गोल
खिड़की दरवाजे………?
नहीं मालूम तो घूमो गोल |

बतूता का जूता –

इब्नेबतूता ,पहन के जूता,
निकल पड़े ,तूफान में |
थोड़ी हवा, नाक में घुस गयी,
घुस गयी, थोड़ी कान में |
कभी ना को, कभी कान को,
मलते ,इब्नेबतूता |
इसी बीच में, निकल पड़ा,
उनके पैरों का जूता |
उड़ते -उड़ते ,जूता उनका,
जा पहुंचा ,जापान में |
इब्नेबतूता, खड़े रह गए,
मोची की दुकान में |

शाहबाद की गुड़िया –

शाहाबाद की गुड़िया के हाथ नहीं है,
गुड़िया कैसे नाचेगी ?
गुड़िया कैसे नाचेगी ?
बंदर के हाथ लगाकर ऐसे नाचेगी |
शाहबाद की गुड़िया की आंख नहीं है,
गुड़िया कैसे देखेगी ?
गुड़िया कैसे देखेगी ?
बिल्ली की आंख लगाकर ऐसे देखेगी |
शाहाबाद की गुड़िया के कान नहीं है,
गुड़िया कैसे सुनेगी ?
गुड़िया कैसे सुनेगी ?
हाथी के कान लगाकर ऐसे सुनेगी |
शाहाबाद की गुड़िया की नाक नहीं है,
गुड़िया कैसे सुघेगी ?
गुड़िया कैसे सुघेगी ?
कुत्ते की नाक लगाकर ऐसे सुघेगी |
शाहाबाद की गुड़िया के दांत नहीं है,
गुड़िया कैसे काटेगी ?
गुड़िया कैसे काटेगी ?
चूहे के दांत लगाकर ऐसे कटेगी |

गुब्बारों का लेकर ढेर –

गुब्बारों का लेकर ढेर,
देखो आया है समशेर |
हरे, बैगनी, लाल- सफेद,
रंगों के है कितने भेद |
कोई लंबा ,कोई गोल ,
लाओ पैसे ले लो मोल |
मुट्ठी में लो इनकी डोर,
इन्हें घुमाओ चारों ओर |
हाथों से दो इन्हें उछाल,
लेकिन छूना इन्हें संभाल |
पड़ा किसी के ऊपर जोर,
एक जोर का होगा शोर |
गुब्बारा फट जाएगा,
खेल खत्म हो जाएगा |

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