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प्रार्थना

जीवन विद्या प्रार्थना: वंदना उनकी करें

मानव मूल्य जब हम चरितार्थ करना शुरू करते है, तभी हम सही करने में समर्थ, पारंगत होते हैं | तब तक किसी न किसी उन्माद में जकडे ही रहते है और हमको सही करने का कोई रास्ता मिलता नहीं | इसे ही नासमझी और भटकना कहा है | यही समस्या और दुःख के रूप में…
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