कुछ ऐसी बाल कविताये जो हर उम्र के लोगो को पसंद आये (Some child poems that like people of all ages)

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लड्डू भाई

लड्डू भाई गोल मटोल ।
बोलो बोलो कितना मोल।
तुम राजा पकवानों के ।
सजते बड़ी दुकानों पे।
तुम्हें देखकर हो जाती हैं
सब की हालत डामाडोल ।
लड्डू भाई गोल मटोल ।
हलवाई के प्यारे हो ।
सब के राज दुलारे हो ।
लड्डू भाई गोल मटोल ।
सालगिरह हो बाबू की।।
शादी हो शोभा की ।
या हो बच्चों का मेला ।
लोग तुम्हें बनवाते हैं ।
बजा बजाकर बाजे ढोल ।
लड्डू भाई गोल मटोल ।
बोलो बोलो कितना मोल।

आम

आम फलों का राजा है।
सबके मन को भाता है।
देखो सेब लाल लाल ।
खाकर होते हम भी लाल ।
केला भी है बड़ा निराला ।
खाते इसको मोटे लाला ।
खट्टा मीठा बेर गांव में ।
खाते बच्चे बैठ छांव में ।

तारे

जगमग जगमग चमके तारे।
आसमान में दम के तारे ।
नन्हे नन्हे प्यारे प्यारे ।
चंदा के हैं राज दुलारे।
कितने सारे चमके तारे ।
टिमटिम करते हैं ये सारे।
कभी नहीं यह हिम्मत हारे।
अंधियारे में चमके तारे ।
आंख मिचोली खेले तारे।
सबको पास बुलाते तारे।

मोर

देखो सीता तुम उस ओर ।
नाच रहा है सुंदर मोर।
केयूं केयू गाता गीत ।
हमें बुलाता प्यारा मीत।
सबके मन को खूब लुभाता
वह सतरंगे पंख फैलाता ।

भंवरा


भंवरा बोला गुन गुन गुन ।
कैसी लगती मेरी धुन ।
चहक उठी चिड़िया चुनमुन ।
तू भी मेरा गाना सुन ।
भंवरा बोला अरे बहन,
भली नहीं अपनी अनबन ।
बीन बजाऊं मैं ,तू गा ।
मीठी धुन पर ,रस बरसा ।

कोयल काली

मीठे बोल सुनाती कोयल ।
कुहू कुहू गाती कोयल ।
बौर लगे तो आती कोयल,
अमराई में गाती कोयल ।
काली और मतवाली कोयल।
लगती बहुत निराली कोयल ।
इस डाली से उस डाली पर,
फुदक फुदक जाती कोयल ।
हमें बुलाती खुद ना आती,
है शर्माती ,काली कोयल ।
अपनी जैसी मीठी बोली ,
हमें सिखाती प्यारी कोयल।

बहादुर बनूंगा

अम्मा मुझे छोटी सी मोटर मंगा दो
मोटर चलाऊंगा पम पम बजाऊंगा
अम्मा मुझे मुझे छोटा सा बाजा मंगा दो

अम्माँ मुझे, छोटा सा बाजा मंगा दो ।
बाजा बजाऊंगा सबको नचाउंगा ।
अम्माँ मुझे, छोटा सा बाजा मंगा दो ।

अम्मा मुझे छोटी सी साइकिल मंगा दो
साइकिल चलाऊंगा ट्रिंग ट्रिंग बजाऊंगा।

अम्माँ मुझे, छोटा सा बाजा मंगा दो ।

अम्मा मुझे छोटी सी पुस्तक मंगा दो ।
पुस्तक पढ़ लूंगा ,बहादुर बनूंगा
अम्माँ मुझे, छोटा सा बाजा मंगा दो ।

कुत्ता बोला

भो भो करता, कुत्ता बोला
बिल्ली का मन ,डर से डोला।
दूध में रोटी ,मुझको भाती
तू चोरी से ,चट कर जाती।
रात को चौकीदारी करता ।
सोता ना, जगता ही रहता ।
तुझको सीख अभी हूं देता।
ठहर मैं तेरी खबर हूं लेता।
भागी बिल्ली डर के मारे ।
अब ना आऊं पास तुम्हारे ।

ईद

मिलकर ईद मनाते ,
दूध सेवइयां खाते ।
कपड़े पहने नए नए
करीम से मिलने श्याम गए।
ईद के मेले में जा खाई ।
सब को दूध जलेबी भाई ।
घर घर जाकर ईद मिली ।
खाई मिठाई ईदी दी ।
बोले गुलू के मामा जी।
ईद मुबारक हो चाचाजी ।
एक साल में आती ईद ।
सबको गले मिलाती ईद।

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