स्काउटिंग के कार्यक्षेत्र व विभाजन

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कार्यक्षेत्रः-

प्रणेता बेडेन पॉवेल द्वारा बताए गए कार्यक्षेत्रः-


(1) चरित्र निर्माण- स्वावलंबन और आत्मविश्वास
(2) समाज सेवा- दूसरों की सेवा और नित्य एक भलाई का कार्य।
(3) स्वास्थ्य- आरोग्य के नियम
(4) हस्त कौशल- तरह- तरह के कौशलों का ज्ञान
(5) धार्मिकता- ईश्वर में विश्वास और अपने धार्मिक नियमों का पालन तथा दूसरों के धार्मिक विश्वासों का सम्मान।

नित्य भलाई का कार्य-
स्काउट/गाइड सदैव सेवा कार्य में लगे रहते हैं, फिर भी उन्हें नित्य एक भलाई का कार्य करना अनिवार्य होता है। इसके लिए स्कार्फ में एक गाँठ लगाई जाती है।
नित्य डायरी लिखना-
स्काउट/गाइड को प्रतिदिन अपने कार्यों एवं दिनचर्या का रिकार्ड रखने के लिए डायरी तैयार करना चाहिए।
स्काउटिंग जीवन के हर पड़ाव पर जरुरी-
स्काउटिंग एक जीवन शैली है। बचपन से वृद्धावस्था तक स्काउटिंग हमारे जीवन में नवीन चेतना का संचार करती है। हर उम्र के व्यक्ति को स्काउटिंग जीवन शैली से जीना चाहिये।

उम्र अनुसार विभाजनः-

  • 3 से 5 वर्ष- बनी- टमटोला
  • 6 से 10 तक- कब- बुलबुल
  • 10 से 17 तक- स्काउट- गाइड
  • 17 से 25 तक- रोवर्स- रेंजर्स
  • 25 से अधिक- प्रशिक्षक, मास्टर, तथा स्वैच्छिक समयदानी बनकर स्काउट आंदोलन की सेवा करना।

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