प्रथम सोपान की गांठे

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प्रथम सोपान की गांठे- रीफ नॉट, शीट बैंड, क्लोव हिच, बोलाइन शीप शैंक, फिशरमैन्स नॉट, राउण्ड टर्न

प्रथम सोपान की गांठे रीफ नॉट ( डॉक्टरी गांठ ) : इसे चपटी या चौकोर गांठ भी कहते हैं। यह गांठ चुभती नहीं है। डॉक्टर लोग पट्टी के दोनों सिरों को इसी गांठ से बांधते हैं।पार्सल बांधने में भी यही गांठ काम में लायी जाती है।


विधि : रस्सी के दोनों सिरों को अलग-अलग दोनों हाथों में लें। बांयें हाथ वाली रस्सी को दाहिने हाथ वाली रस्सी के ऊपर रखकर साधारण गांठ लगा दें। अब पहले सिरे को दूसरे सिरे के ऊपर रखें तथा साधारण गांठ लगा दें। सिरों को पकड़कर खींच दें। गांठ तैयार हो गयी ध्यान रहे रस्सी के दोनों सिरे रस्सी के एक ही ओर हों।

प्रथम सोपान की गांठे शीट बैंड (जुलाहा गांठ) : इसे सन्धि या पाल गांठ भी कहते हैं। दो समान या असमान रस्सियों अर्थात्, मोटी-पतली,भीगी-सूखी, चिकनी-खुरदरी रस्सियों को जोड़ने और कपड़े के साथ रस्सी को बांधने में यह गांठ काम आती है।


विधि : मोटी रस्सी को मोड़कर उसका लूप बनाकर अपने बायें हाथ में लें। पतली रस्सी के सिरे को बांये हाथ वाले फन्दे में नीचे से डालें और बायें हाथ वाले फन्दे के चारों ओर चक्कर लगाकर रस्सी को उसी रस्सी के नीचे से निकालकर खींच लें। इस प्रकार गांठ लग गयी।

प्रथम सोपान की गांठे क्लोव हिच (खूटा फांस): इसे नाग फांस, छप्पर फांस या छनबन्द भी कहते हैं। यह फांस छप्पर बांधने, पुल बनाने, सीढ़ी या मचान तैयार करने तथा पशुओं को खूटे से बांधने में काम आती है।


विधि :रस्सी को इस प्रकार पकड़ें कि उसका बड़ा भाग बांये हाथ में तथा छोटा भाग दांये हाथ में रहे।अब दाहिने हाथ से किसी खम्भे के चारों ओर रस्सी का चक्कर लगा दें। फिर दूसरा चक्कर पहले चक्कर के नीचे सेक्रास करते हुए लगाएं। दोनों चक्करों के बीच में रस्सी केदाहिने सिरे को डालकर दोनों सिरों को खींच देने से गांठ तैयार हो जाएगी।

प्रथम सोपान की गांठे– बोलाइन(ध्रुव गांठ):-

इसे अटल गांठ भी कहते हैं। इस गांठ से ऐसा छल्ला बनाया जाता है जो फिसलता नहीं है। यह गांठ बेहोश आदमी को धुएं या पानी से निकालकर बाहर लाने के काम आती है। घरों में पशुओं के गले में रस्सी बांधने के लिये, बचाव व राहत कार्यों (रेसक्यू मैथड्स)में भी किया जाता है।


विधि :रस्सी को इस प्रकार पकड़ें कि लम्बा सिरा बांये हाथ में और छोटा सिरा दाहिने हाथ में रहे। बांयें हाथ वाली रस्सी पर एक छोटा लूप (छल्ला) इस प्रकार बनायें कि बांया सिरा नीचे और बाहर की ओर रहे । अब दाहिने हाथ की रस्सी के सिर को बांये हाथ वाली रस्सी के छल्ले में नीचे से डालें और फिर सिरे को पकड़कर लटकी हुई रस्सी के नीचे से निकालकर उसी छल्ले में ऊपर से डाल दें। बायें हाथ की लम्बी रस्सी कोखींच दें,गांठ तैयार हो गई।

प्रथम सोपान की गांठे शीप शैंक (लघुकर गांठ) :- 

रस्सी को आवश्यकतानुसार बिना काटे छोटा करने अथवा टूटती रस्सी में रोक लगाने (सहारा देने) के लिये इस गांठ का प्रयोग किया जाता है।


विधि : रस्सी को आवश्यकतानुसार जितना छोटा करना हो, चित्र के अनुसार लपेट लें और दोनों मोड़ों पर रस्सी के दोनों सिरों से अलग-अलग फन्दे बनाकर डाल दें। अब रस्सी के दोनों सिरों को खींचकर कस देने से गांठ तैयार हो जायेगी।


प्रथम सोपान की गांठे फिशरमैन्स नॉट (मछुआरा गांठ):- 

यह गांठ रस्सी को जोड़ने या लोटे को लटका कर ले चलने या लोटे द्वारा कुएं से पानी निकालने के काम में आती है। नायलोन या चिकनीरस्सी को जोड़ने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।


विधि: एक ही रस्सी केदोनों सिरों को दोनों हाथों में लें। अब दाहिने हाथ वाले सिरेको बांये हाथ और बांये हाथ वाले सिरेको दाहिने में लेकर केवल इन सिरों को कुछ दूरी तक खींचें। फिर दोनों सिरोंसे अलग-अलग एक-एकसाधारण गांठ लगा दें।अब सिरों को खींचने से गांठ तैयार हो जायेगी।

प्रथम सोपान की गांठे राउन्ड टर्न एन्ड टू हाफ हिचेज- 

इसे टैंट के खूटे, बल्ली, या छल्ले में लगाया जाता है। इसे तम्बू गांठ भी कहते हैं।


विधिः रस्सी को खूटे के ऊपर डालकर एक चक्कर लगाओ।अब चुस्त सिरे से सुस्त सिरे पर दो अर्ध फांस लगाओ।दोनों अर्धफांस एक ही दिशा में होनी चाहिए। दोनों फांसों को पास-पास लाने से खूटा फांस बन जाती है।

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