पश्चिमोत्तान आसन कैसे करें

पश्चिमोत्तान आसन

  • इस आसन को नित्य करने से मनुष्य में पुरुषत्व की अभिवृद्धि होती है।
  • इसे बैठकर दोनों पैर सीधे आगे की ओर तानकर किया जाता है। पैरों को सटाकर रखें, 2 3 घुटने व पंजे मिले रहें, हाथ ऊपर तानकर घड़ को ऊपर को खींचते हुए धीरे-धीरे आगे झुकें ।
  • सिर को घुटनों पर लाकर, दोनों हाथों से पैर के अंगूठे पकड़ लें। कुछ देर तक इस मुद्रा में रहें। फिर धीरे-धीरे हाथ व धड़ पूर्व अवस्था में लायें। प्रारम्भ में इस आसन को करने में कष्ट होगा किन्तु अभ्यास करते रहने से यह सुख का आधार बन जायेगा क्योंकि इस आसन से पेट जनित, वीर्य जनित रोग दूर होते हैं। कब्ज दूर होता है, तिल्ली, जिगर आदि को बल मिलता है, कमर दर्द, गठिया आदि विकार दूर हो जाते हैं।
पश्चिमोत्तान आसन कैसे करें

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply