शालीन-चाल, आदेश व कवायद (Orderly movement, Commands & Drill)

शालीन-चाल, आदेश व कवायद (Orderly movement, Commands & Drill)


व्यक्ति की परख उसके पहनावे, उठने-बैठने, चलने-फिरने तथा बोलचाल से आसानी से हो जाती है। जिन लोगों की शिक्षा अनुशासन पूर्ण वातावरण में होती है उनका चाल-चलन पहनावा तथा व्यवहार शालीन होता है। स्काउट/गाइड संगठन पूर्ण वेश में होने, चुस्ती व फुर्ती से उठने, बैठने, चलने से उनमें जीवटता बनी रहती है एक अनुशासित तथा निश्चित गणवेश धारी संगठन है। स्काउट/गाइड के ठीक व तथा देखने वाले भी उनकी ओर आकर्षित होते हैं। फलस्वरूप वे सुयोग्य नागरिक की श्रेणी में अपना स्थान बना लेते हैं, जिससे स्काउट संगठन की छवि में भी निखार आ जाता है। अतः प्रत्येक स्काउट/गाइड को ठीक प्रकार खड़े होने, बैठने, चलने का ढंग आना चाहिए । जब खड़े हों तो दोनों पैरों में बराबर वजन रहे, बैठे हों तो पालथी मार कर बैठें। किसी बड़े से बात करें तो ‘सावधान’ की स्थिति में खड़े हों। भूमि पर अथवा कुर्सी पर बैठे हो तो धड़ सीधा कर बैठें। चलते समय सीना उठा हो तथा शरीर सीधा रहे। आदेश व कवायद से स्काउट/गाइड में उक्त गुणों का समावेश स्वयमेव हो जाता है। अतः स्काउट गाइड को आदेश-पालन एवं कवायद का अच्छा अभ्यास करना नितान्त आवश्यक है।

आदेश (Commads)

स्काउट/गाइड शिक्षा स्काउट/गाइड की नेतृत्व शक्ति को निखारने में सहायक होती है। नेतृत्व शक्ति के विकास में ‘आदेश देने की कला’ का अपना अलग ही योगदान रहता है। अतः स्काउट/गाइड को आदेश देने में दक्ष होना चाहिए। प्रत्येक आदेश के तीन भाग होते है- 1. आदेशात्मक भाग (Cautionary Part) 2. विराम (Pause) 3. निष्पादित भाग (Executive Part)। आदेशात्मक भाग में आवाज को कुछ लम्बी खींच कर क्रिया के लिए आगाह किया जाता है। एक क्षण रुककर निष्पादित भाग को तेजी से बोला जाता है जिस पर क्रिया शुरू कर दी जाती है। उदाहरण के लिये पीछे एए-मुड़ -चल। पीछे की आवाज में यदि एक सेकेण्ड समय लगता है तो पहले भाग में तीन सेकेण्ड अर्थात् तिगुना लगेगा।

प्रमुख आदेश सूची

  • पीछे – मुड़
  • साव-धान
  • विश्राम
  • आराम-से
  • दाँये-मुड़
  • बायें-मुड़
  • जैसे-थे
  • तीन कदम बायें-चल
  • दाँये से गिनती-कर
  • कदम – ताल दो कदम
  • आगे-चल दाँय – देख
  • तेज – चल दो कदम
  • पीछे-चल बायें – देख
  • दल कम्पनी-थम
  • ध्वज लीडर चल-दो
  • सामने – देख
  • बैठ – जा
  • कदम-ताल सैल्यूट
  • कतार -बन
  • खड़े-हो
  • धीरे-चल
  • सीध-लो
  • दौड़ – चल
  • खुली लाइन-चल
  • दाँये से बायें से
  • तीन कदम दाँये
  • निकट लाइन-चल
  • गिनती कर
  • सामने -देख
  • स्वस्थान
  • विसर्जन


आदेश और कवायद (Commands & Drill)

आदेश नायक द्वारा दिया जाता है, जबकि आदेश की क्रिया स्काउट/गाइड द्वारा की जाती है। इसी क्रिया को ड्रिल या कवायद के नाम से भी जाना जाता है। कुछ प्रमुख आदेश व ड्रिल का वर्णन यहाँ पर किया जा रहा है।

साव-धान्- इस ड्रिल में विश्राम की अवस्था से बायें पैर को दाहिने पैर के पास लाकर एड़ी मिली, पंजे खुले, पैरों में 30′ का कोण बना हो। हाथ सीधे, नीचे की ओर तने, आधी मुट्ठी बंधी, अंगूठे का रुख नीचे की ओर रहे। पेट तना, सीना उठा, कन्धे तनिक पीछे की ओर तथा नजर 100 मीटर आगे रहे। इस अवस्था में अधिक देर तक खड़े रहना संभव नहीं होता।

विश्राम्- यह अवस्था भी सावधान के समकक्ष ही है। अन्तर इतना है कि इसमें पैरों में लगभग 12 से. मी. का फासला हो जाता है, जिसमें शरीर का वजन दोनों पैरों में बराबर पड़े। हाथ पीछे बंध जाते हैं। सावधान से विश्राम की स्थिति में आने पर बाँयां पैर बाँयीं तरफ 12 से. मी. हटाते हुए हाथ पीछे इस प्रकार से बंध जाते हैं कि, बायें हाथ की चार अंगुलियाँ अन्दर को हों, उनके ऊपर दाँये हाथ का अंगूठा हो, सभी अंगुलियों का रुख नीचे की ओर हो। सावधान की तरह इसमें भी शरीर का कोई भी भाग (अंग) नहीं हिलना चाहिए। इस अवस्था में सावधान से अधिक देर तक खड़े रह सकते है।

आराम-से- विश्राम की अवस्था में यदि हम शरीर को पूरा ढीला छोड़ दें, कमर से ऊपर शरीर हिला-डुला सकें तथा हाथ भी हिलाये जा सकते हैं तो इसे हम ‘आराम से’ की स्थिति कहेंगे। इस अवस्था में अधिक देर तक खड़ा रहना सम्भव है।

दाँये मुड़- बाँयें पैर का पंजा और दाँयें पैर की एड़ी भूमि से तनिक ऊपर उठाकर सीने के बल से 90 के कोण पर दाहिने मुड़ें जिसमें प्रथम अवस्था में पैरों में फासला होगा। एक सेकण्ड शरीर का संतुलन साधते हुए रुक । तत्पश्चात् तेजी से पीछे के पैर का अगले से सावधान की स्थिति में मिला दें। मुड़ते समय हाथ सीधे. आधी मुट्ठी बंधी तथा बगल से चिपके रहें।

बायें-मुड़-दाँये मुड़ की ही तरह बाये ओर 90 के कोण पर मुई। इस बार बायें पैर का पंजा और बायें पैर की एड़ी उठायें।

पीछे-मुड़-दाँये हाथ की ओर से रुख करते हुए पीठ पीछे (180 कोण पर) मुड़ें। शेष प्रक्रिया दाँये-मुड़ की भांति करें।

कदम-ताल- इस आदेश पर बाया पैर घुटने और पेट से 90 का कोण बनाते हुए ऊपर उठायें। पंजा भूमि की ओर मुड़ा हो तथा दोनों हाथ सावधान की स्थिति पर हों। ज्योंही बाँयें पैर का पंजा भूमि पर लगे दाये पैर को उठायें। जब दाँया पैर भूमि का स्पर्श करें, बाँया उठा दें। इस प्रकार क्रमशः करते रहें।

तेज-चल- सावधान की अवस्था से बाँयें पैर और दाँये हाथ को तेजी से आगे इस प्रकार निकालें कि पैर छोटा, तेजगति से और एड़ी भूमि का स्पर्श करें। दाँया हाथ उतना ही ऊपर उठे जितना बाँया (पीछे का) हाथ ऊपर उठ सकें। अर्थात् दोनों हाथ एक सी ऊँचाई पर उठे। अब दाँया पैर आगे और बाँया हाथ आगे निकालें। यह क्रम जारी रखें। इस आदेश में हाथ कुहनी से सख्त पर कन्धे पर ढीले रहें। आधी मुट्ठी बंधी अंगूठा आगे की ओर, हाथ हिलाते समय मुट्ठी भीतर (शरीर) की ओर हो, घुटने सख और नजर आगे रखें

दल/कम्पनी-थम- बाँया पैर जब भूमि का स्पर्श करे दल कम्पनी को आदेश दें, दाँये पर ‘थम’, दो अतिरिक्त संख्या (एक-दो) पर बाँया पैर रुके तथा अन्त में दाया।

बैठ-जा- इस आदेश पर तनिक आगे झुकते हुए तथा भूमि से एक साथ दोनों पैर उठा कर रास्ते में पैरो में कैंची बनाकर पालथी मार कर बैठें। हाथ सीधे तने, मुट्ठी बंधी घुटनों के ऊपर रखें। धड़ सीधा रहे।

आराम से- बैठी स्थिति में शरीर को ढीला छोड़ दें तथा हाथ ढीले कर दें।

खड़े-हो/उठ-जा- इस आदेश पर तनिक आगे की ओर झुककर दोनों पैरों से एक साथ उछाल लेकर विश्राम अवस्था में खड़ा होना चाहिए।

दौड़-चल- इस आदेश में दोनों हाथों की कुहनी मोड़कर मुट्ठी बंधे हाथ सीने के सामने लाकर बायें पैर के पंजे आगे रखें। इसी प्रकार दाहिने पैर को भी। चार की गिनती में समय मिलाने के लिये आदेश दें। थम का आदेश भी चार की गिनती पर होगा।

तीन/कदम दाँये बाँये-चल- जितने कदम दाँये बाँये चलने का आदेश हो बाँये चलने के लिये बाँये पैर से शुरू कर दाँये पैर को अन्त में मिला दें। इसी प्रकार दाहिने चलने पर बाँयें पैर को अन्त में मिलायें।

आगे/पीछे-चल- की स्थिति में बाँया पैर ही पहले आगे या पीछे निकलेगा।

दायें/बायें से गिनती-कर-अधिकाशंतः दाँये से गिनती का आदेश दिया जाता है। पहला व्यक्ति गर्दन दाँये मोड़कर ‘एक’ की गिनती बोलेगा तथा आगे के सदस्य क्रमशः दो-तीन-चार-आदि संख्या बोलकर गर्दन दाँये मोड़कर अपने से आगे को संकेत करता जायेगा। अन्तिम सदस्य गिनती करेगा किन्तु गर्दन दाँये नहीं मोड़ेगा। यही क्रम बाँये से गिनती पर अपनाया जायेगा।

शेष आदेशों में भी स्थिति के अनुसार क्रिया होगी।


मार्च-पास्ट (March Past)

मार्च पास्ट/माचिंग ड्रिल का सबसे महत्वपूर्ण भाग है अथवा यों कहा जाय कि सारी ड्रिल का अन्तिम परिणाम है। मार्च पास्ट से अनुशासन व चुस्ती-फुर्ती की परख होती है। सामान्यतया माचिंग तीन-तीन की पंक्तियों में की जाती है। किन्तु बड़े समारोहों में जहाँ संख्या अधिक होती है, चार-छ:-आठ आदि की पंक्तियों में भी किया जाता है। तीन पंक्तियों के मार्च-पास्ट में लीडर दल से तीन कदम आगे होगा। आगे के तीनों दर्शक फासला बनाये रखने और सीध में दल को ले जाने के लिये जिम्मेदार रहते हैं। उनमें भी सबसे अधिक जिम्मेदारी दाँये दर्शक की रहती है। इसीलिये वह ‘दाँये-देख’ के आदेश पर सामने ही देखता है। मार्च पास्ट में हाथों का बराबर ऊँचाई पर हिलना, पैरों का एक साथ निकलना,
दाँये-बायें से सीधा तथा बराबर फासला बनाये रखना अति आवश्यक होता है। जो दल/कम्पनी उक्त बातों में दक्ष हो उसी का माचिंग सर्वोत्तम कहलाता है।

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