मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal ) का मूल्यांकन

मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal ) का प्रस्तावना

अधिकतर बच्चे खाली पेट स्कूल पहुंचते हैं। जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं उन्हें भी दोपहर तक भूख लग आती है और वे अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। मध्याह्‌न भोजन (Mid Day Meal) बच्चों के लिए ”पूरक पोषण” के स्रोत और उनके स्वस्थ विकास के रूप में भी कार्य कर सकता है।

यह समतावादी मूल्यों के प्रसार में भी सहायता कर सकता है क्योंकि कक्षा में विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे साथ में बैठते हैं और साथ-साथ खाना खाते हैं। विशेष रूप से मध्याह्‌न भोजन स्कूल में बच्चों के मध्य जाति व वर्ग के अवरोध को मिटाने में सहायता कर सकता है।

स्कूल की भागीदारी में लैंगिक अंतराल को भी (Mid Day Meal) कार्यक्रम कम कर सकता है क्योंकि यह बालिकाओं को स्कूल जाने से रोकने वाले अवरोधों को समाप्त करने में भी सहायता करता है। मध्याह्‌न भोजन स्कीम छात्रों के ज्ञानात्‍मक, भावात्मक और सामाजिक विकास में मदद करती है। सुनियोजित मध्याह्‌न भोजन को बच्चों में विभिन्न अच्छी आदते डालने के अवसर के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। यह स्कीम महिलाओं को रोजगार के उपयोगी स्रोत भी प्रदान करती है।

मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal ) का इतिहास

  • स्कूलों में मिड डे मील का भारत में एक लंबा इतिहास रहा है। 1925 में, मद्रास नगर निगम में वंचित बच्चों के लिए एक (Mid Day Meal) कार्यक्रम शुरू किया गया था।
  • 1980 के मध्य तक तीन राज्य गुजरात, केरल और तमिलनाडु और पॉन्डिचेरी के केंद्र शासित प्रदेशों ने 1990-91 तक प्राथमिक स्तर पर पढ़ने वाले बच्चों के लिए अपने स्वयं के संसाधनों के साथ पकाए गए मिड डे मील कार्यक्रम को सार्वभौमिक बना दिया था। सार्वभौमिक या बड़े पैमाने पर बारह राज्यों तक बढ़ गया था।
  • मध्याह्‌न भोजन स्कीम देश के 2408 ब्लॉकों में एक केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के रूप में 15 अगस्त, 1995 को आरंभ की गई थी।
  • वर्ष 1997-98 तक यह कार्यक्रम देश के सभी ब्लाकों में आरंभ कर दिया गया।
  • वर्ष 2003 में इसका विस्तार शिक्षा गारंटी केन्द्रों और वैकल्पिक व नवाचारी शिक्षा केन्द्रों में पढ़ने वाले बच्चों तक कर दिया गया।
  • अक्तूबर, 2007 से इसका देश के शैक्षणिक रूप से पिछड़े 3479 ब्लाकों में कक्षा VI से VIII में पढ़ने वाले बच्चों तक विस्तार कर दिया गया है।
  • वर्ष 2008-09 से यह कार्यक्रम देश के सभी क्षेत्रों में उच्च प्राथमिक स्तर पर पढने वाले सभी बच्चों के लिए कर दिया गया है।
  • राष्‍ट्रीय बाल श्रम परियोजना विद्यालयों को भी प्रारंभिक स्‍तर पर मध्‍याह्न भोजन योजना के अंतर्गत 01.04.2010 से शामिल किया गया है।

मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal )का लोगो

मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal )का लोगो

मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal ) कार्यक्रम के उद्देश्य

इस स्कीम के लक्ष्य भारत में अधिकांश बच्चों की दो मुख्य समस्याओं अर्थात्‌ भूख और शिक्षा का इस प्रकार समाधान करना है :-

(i) सरकारी स्थानीय निकाय और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल और ईजीएस व एआईई केन्द्रों तथा सर्व शिक्षा अभियान के तहत सहायता प्राप्‍त मदरसों एवं मकतबों में कक्षा I से VIII के बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना

(ii) लाभवंचित वर्गों के गरीब बच्‍चों को नियमित रूप से स्‍कूल आने और कक्षा के कार्यकलापों पर ध्‍यान केन्द्रित करने में सहायता करना, और

(iii) ग्रीष्‍मावकाश के दौरान अकाल-पीडि़त क्षेत्रों में प्रारंभिक स्‍तर के बच्‍चों को पोषण सम्‍बन्‍धी सहायता प्रदान करना।

केन्द्रीय सहायता के संघटक

इस समय मध्याह्‌न भोजन (Mid Day Meal) स्कीम राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को निम्नलिखित के लिए सहायता प्रदान करती हैः-

(i) प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए 100 ग्राम प्रति बच्चा प्रति स्कूल दिवस    की दर से और उच्‍च प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए 150 ग्राम प्रति  बच्चा प्रति स्कूल दिवस की दर से भारतीय खाध निगम के निकटस्थ गोदाम से निःशुल्क खाद्यान्न (गेहूं/चावल) की आपूर्ति। केन्द्र सरकार भारतीय खाद्य निगम को खाद्यान्न की लागत की प्रतिपूर्ति करती है।

(ii) 11 विशेष श्रेणी वाले राज्यों (अर्थात-अरूणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश उत्तराखण्‍ड और त्रिपुरा) के लिए दिनांक 1.12.2009 से इनमें प्रचलित पी.डी.सी. दरों के अनुसार परिवहन सहायता। अन्य राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 75/-रू. प्रति क्विंटल की अधिकतम सीमा के अधीन भारतीय खाद्य निगम से प्राथमिक स्कूल तक खाद्यान्न के परिवहन में हुई वास्तविक लागत की प्रतिपूर्ति।

(iii) दिनांक 1.12.2009 से भोजन पकाने की लागत (श्रम और प्रशासनिक प्रभार को छोङ़कर) प्राथमिक बच्चों के लिए 2.50 रूपए की दर से और उच्च प्राथमिक बच्चों के लिए 3.75 रूपए की दर से प्रदान की जाती है और दिनांक 1.4.2010 तथा दिनांक 1.4.2011 को इसे पुनः 7.5 प्रतिशत तक बढ़ाया गया। १ जुलाई २०१६ से इन दरों में फिर से परिवर्तन किया गया है। और परिवर्तित दरें नीचे टेबिल में दी गई हैं। भोजन पकाने की लागत की केन्द्र और पूर्वोत्तर राज्यों के मध्य हिस्सेदारी 90:10 के आधार पर है और अन्य राज्यों/संघ राज्यों के साथ 60:40 के आधार पर वहन की जाएगी।

रसोइया और सहायकों के लिए मानदेय

रसोइया और सहायकों के लिए मानदेय का भुगतान खाना पकाने की लागत के तहत प्रति दिन प्रति बच्चा 40.40 रुपये के श्रम और अन्य प्रशासनिक शुल्क से किया जाता था। कई मामलों में मानदेय इतना कम था कि भोजन पकाने के लिए जनशक्ति को संलग्न करना बहुत मुश्किल हो गया। मानदेय के भुगतान के लिए एक अलग घटक रु। १,००० प्रति माह प्रति कुक-सह-सहायक १.१२.२०० ९ से शुरू किया गया था। उपरोक्त निर्धारित दर पर मानदेय का भुगतान रसोईया-सह-सहायक को किया जा रहा है। हालाँकि, कुछ राज्यों में कुक-कम-हेल्पर्स को मानदेय 1000 / – से अधिक का भुगतान किया जा रहा है।

कुक-कम-हेल्पर की प्रबंध के लिए निम्नलिखित मानदंड बनाए गए हैं:

  • 25 छात्रों तक के स्कूलों के लिए एक कुक-कम-हेल्पर।
  • 26 से 100 छात्रों वाले स्कूलों के लिए दो कुक-सह-सहायक।
  • 100 छात्रों तक हर अतिरिक्त के लिए एक अतिरिक्त कुक-कम-हेल्पर।

मध्‍याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal) का नवीनीकरण

बारहवीं योजना के दौरान मध्‍याह्न भोजन योजना (एमडीएमएस) का निम्‍न प्रकार से सुधार करने का प्रस्‍ताव है:-

  • (मध्‍याह्न भोजन योजना का जनजाति, अनुसूचित जाति और अल्‍पसंख्‍यक बहुल जिलों के गैर-सहायता प्राप्‍त निजी स्‍कूलों में विस्‍तार।
  • प्राथमिक विद्यालयों की परिसरों में स्थित पूर्व-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्‍चों के लिए भी इस योजना का विस्‍तार।
  • मौजूदा घटकों या स्‍कूलों के लिए सहायता के तौर तरीकों का संशोधन।
  • मध्‍याह्न भोजन मूल्‍य (Mid Day Meal) सूचकांक का विशेष रूप से मध्‍याह्न भोजन की वस्‍तुओं के मूल्‍य पर आधारित खाने की लागत का संशोधन।
  • उत्‍तर-पूर्वी प्रदेश (एनईआर) को छोड़कर अन्‍य राज्‍यों के लिए माल वहन सहायता का संशोधन। इसका 75 रुपये प्रति क्विन्टल की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर 150 रुपया प्रति क्विन्टल की गई है।
  • वर्ष 2013-14 और 2014-15 के दौरान रसोइया-सहायकों का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपया और वर्ष 2015-16 तथा 2016-17 के दौरान रसोइया-सहायक का मानदेय 2000 रुपये प्रति माह किया गया है।
  • खाद्यान्न लागत, खाना पकाने की लागत, माल वहन सहायता तथा रसोइया-सहायक को मिलने वाले मानदेय के लिए कुल पुनरावर्ती केन्‍द्रीय सहायता के तीन प्रतिशत की दर से प्रबंधन निगरानी और मूल्‍यांकन दरों का संशोधन।
  • नये स्‍कूलों के लिए किचन की बर्तन खरीदने और हर पांच साल बाद किचन के बर्तनों को बदलने के लिए 15000 रुपये प्रति स्‍कूल की दर से केन्‍द्रीय सहायता की पद्धति का संशोधन। सहायता की यह राशि केन्‍द्र और राज्‍यों के बीच 60:40 के अनुपात से और उत्‍तर-पूर्वी प्रदेश के राज्‍यों में 90:10 के अनुपात से वहन की जाएगी।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal Scheme )का एकीकरण

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के साथ समन्वय के उद्देश्य से सभी राज्यों के शिक्षा विभागों को लिखा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम केंद्र सरकार की नई पहल है जिसका उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष की आयु के बच्चों की जांच और प्रबंध करना है। इसके तहत जन्म के समय त्रुटियों, कमियों, बीमारियों, बच्चे के विकास में देरी सहित विकलांगता का प्रबंध करना भी शामिल है।

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर देखें: http://mdm.nic.in

Mid day meal scheme Website

स्कूलों के मध्य-दिवस भोजन (एनपी-एमडीएमएस) के लिए केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम का संशोधन / संशोधन सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित पत्र संख्या No.No.1-4 / 2018-Desk (MDM) Dt.28-02-2019।

मिड डे मील योजना (Mid Day Meal) में सुधार

देशभर में राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेशों में मिड डे मील योजना के अंतर्गत 25.70 लाख रसोईया–सहायकों को काम दिया गया। इन सहायकों को इस कार्य के लिए मानदेय को संशोधित कर 01 दिसंबर, 2009 से एक हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया तथा साल में कम से कम दस महीने कार्य दिया गया। इस कार्य के लिए रसोईया-सहायको को दिए जाने वाले मानदेय का खर्च केन्‍द्र अैर पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के बीच 90:10 के औसत में उठाया गया, जबकि अन्‍य राज्‍यों/केन्‍द्रशासित प्रदेशों तथा केन्‍द्र के बीच यह औसत 60:40 तय किया गया। यदि राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेश चाहे तो इस कार्य में किए जाने वाले खर्च में योगदान निर्धारित अनुपात से अधिक भी कर सकते हैं।

मध्याह्न भोजन योजना स्कूल में भोजन उपलब्ध कराने की सबसे बड़ी योजना है जिसमें रोजाना सरकारी सहायता प्राप्त 11.58 लाख से भी अधिक स्कूलों के 10.8 करोड़ बच्चे शामिल हैं।

Mid Day Meal मीनू 2021 

  • मिड डे मील योजना का मकसद बच्चों को पोषण भरा खाना देना है ताकि उनका विकास अच्छे से हो सके. सरकार द्वारा बच्चों को किस तरह का खाना दिया जाएगा उसके लिए भी गाइडलाइंस तैयार की गई हैं.
  • गाइडलाइन के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के हर बच्चे को दिए जानेवाले खाने में कैलोरी की मात्रा 450 और प्रोटीन (ग्राम में) की मात्रा 12 तक होनी चाहिए. जबकि छठी से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को दिए जानेवाले खाने में कैलोरी की मात्रा 700 और प्रोटीन (ग्राम में) की मात्रा 20 होनी चाहिए.

बच्चों की दिया जानेवाले खाने के बारे में जानकारी और उनकी मात्रा-

खानाकितना मात्रा में दिया जाएगा (ग्राम में)
चावल / गेहूं100 ग्राम, प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए  150 ग्राम, छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए
दाल20 ग्राम, प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए  30 ग्राम, छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए
सब्जियां50 ग्राम, प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए 75 ग्राम, छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए
तेल और वसा5 ग्राम, प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए  7.5 ग्राम, छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए
(Mid Day Meal)

स्रोत: मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं पत्र सूचना कार्यालय |

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