योग की पद्धतियां(Methods of yoga)

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स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदुरूस्‍ती के लिए योग की पद्धतियां :

बड़े पैमाने पर की जाने वाली योग साधनाएं इस प्रकार हैं :

  • यम,
  • नियम,
  • आसन,
  • प्राणायाम,
  • प्रत्‍याहार,
  • धारणा,
  • ध्‍यान,
  • समाधि / साम्‍यामा,
  • बंध एवं मुद्राएं,
  • षटकर्म,
  • युक्‍त आहार,
  • युक्‍त कर्म,
  • मंत्र जप आदि।

यहाँ पर कुछ शब्दावली को जानना जरुरी है जैसे कि,

यम अंकुश हैं तथा नियम आचार हैं।

प्राणायाम की विभिन्‍न मुद्राएं

  • प्राणायाम के तहत अपने श्‍वसन की जागरूकता पैदा करना और अपने अस्तित्‍व के प्रकार्यात्‍मक या महत्‍वपूर्ण आधार के रूप में श्‍वसन को अपनी इच्‍छा से विनियमित करना शामिल है।
  •  श्‍वास – प्रश्‍वास की जागरूकता के विषय में यह कि जब श्वास शरीर के स्‍थान भर रहे हैं (पूरक), स्‍थान भरी हुई अवस्‍था में बने हुए हैं (कुंभक) और विनियमित, नियंत्रित एवं पर्यवेक्षित प्रश्‍वास के दौरान यह खाली हो रहा है (रेचक)।

प्रत्‍याहार ज्ञानेंद्रियों से अपनी चेतना को अलग करने का प्रतीक है, जो बाहरी वस्‍तुओं से जुड़े रहने में हमारी मदद करती हैं।

धारणा ध्‍यान (शरीर एवं मन के अंदर) के विस्‍तृत क्षेत्र का द्योतक है, जिसे अक्‍सर संकेंद्रण के रूप में समझा जाता है।

ध्‍यान शरीर एवं मन के अंदर अपने आप को केंद्रित करना है और समाधि – एकीकरण।

बंध और मुद्राएं प्राणायाम से संबद्ध साधनाएं हैं। इनको योग की उच्‍चतर साधना के रूप में देखा जाता है क्‍योंकि इनमें मुख्‍य रूप से श्‍वसन पर नियंत्रण के साथ शरीर (शारीरिक – मानसिक) की कतिपय पद्धतियों को अपनाना शामिल है। इससे मन पर नियंत्रण और सुगम हो जाता है तथा योग की उच्‍चतर सिद्धि का मार्ग प्रशस्‍त होता है।

षटकर्म विषाक्‍तता दूर करने की प्रक्रियाएं हैं तथा शरीर में संचित विष को निकालने में मदद करते हैं और ये नैदानिक स्‍वरूप के हैं।

युक्‍ताहार (सही भोजन एवं अन्‍य इनपुट) स्‍वस्‍थ जीवन के लिए उपयुक्‍त आहार एवं खान-पान की आदतों की वकालत करता है।

तथापि, आत्‍मानुभूति, जिसे उत्‍कर्ष का मार्ग प्रशस्‍त होता है, में मदद करने वाली ध्‍यान की साधना को योग साधना के सार के रूप में माना जाता है।

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