प्राथमिक स्तर के कक्षाओं में क्या सिखाई जाती है ? Learning Outcomes and Learning indicators

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कक्षा एक से पाँच तक पाठ्यचर्या सबंधी अपेक्षाएँ Learning Outcomes and Learning indicators

प्राथमिक स्तर के बच्चों हेतु ऐसी कौन सी Learning Outcomes and Learning indicators निश्चित किये हैं . उसकी जानकारी बिन्दुवार है-

  • दूसरों की बातों को रुचि के साथ और ध्यान से सुनना
  • अपने अनभुव-संसार और कल्पना-संसार को बेझिझक और सहज ढंग से अभिव्यक्‍त करना
  • अलग-अलग संदर्भों में, अपनी बात कहने की कोशिश करना (बोलकर/ इशारों से/ ‘साइन लैंग्वेज’ द्वारा/चित्र बनाकर)
  • स्तरानुसार कहानी, कविता आदि को सुनने में रुचि लेना और उन्हें मज़े से सुनना और सुनाना
  • देखी, सुनी और पढ़ी गई बातों को अपनी भाषा में कहना, उसके बारे में विचार करना और
  • अपनी प्रतिक्रिया/टिप्पणी (मौखिक और लिखित रूप से) व्यक्‍त करना
  • सुनी और पढ़ी कहानियों और कविताओ को समझकर उन्हें अपने अनभुवों से जोड़ पाना तथा उन्हें अपने शब्दों में कहना और लिखना.
  • स्तरानुसार कहानी, कविता या अनुभव के स्तर पर किसी स्थिति का निष्कर्ष या उपाय निकालना.
  • लिपि-चिह्नों को देखकर और उनकी ध्वनियों को सुनकर और समझकर उनमें सह-सबंध बनाते हुए लिखने का प्रयास करना.

Learning Outcomes and Learning indicators

  • चित्र और संदर्भ के आधर पर, अनमान लगाते हुए पढ़ना.
  • पढ़ने की प्रक्रिया को दैनिक जीवन की (स्कूल और बाहर की) ज़रूरतों से जोड़ना, जैसे–कक्षा और स्कूल में अपना नाम, पाठ्य पुस्तक का नाम और अपनी मनपसंद पाठ्य सामग्री पढ़ना
  • सुनी और पढ़ी गई बातों को समझकर अपने शब्दों में कहना और लिखना
  • चित्रों को स्वयं की अभिव्यक्‍ति का माध्यम बनाना
  • पुस्तकालय और विभिन्न स्रोतों (रीडिंग कॉर्नर, पोस्टर, तरह-तरह की चीज़ों के रैपर, बाल पत्रिकाएँ, साइन लैंग्वेज, ब्रेल लिपि आदि) से अपनी पसंद की किताबें/सामग्री ढूँढकर पढ़ना
  • अलग-अलग विषयों पर और अलग-अलग उद्देश्यों के लिए लिखना
  • अपनी कल्पना से कहानी, कविता आदि लिखना.
  • मुख्य बिंदु /विचार को ढ़ूँढ़ने के लिए विषय-सामग्री की बारीकी से जाँच करना.
  • विषय-सामग्री के माध्यम से, संदर्भ के अनुसार नए शब्दों का अर्थ जानना.
  • मनपसंद विषय का चुनाव करके लिखना.
  • विभिन्न विराम-चिह्नों का समझ के साथ प्रयोग करना.
  • संदर्भ और लिखने के उद्देश्य के अनुसार, उपयुक्त शब्दों, वाक्यों आदि का चयन और प्रयोग करना.
  • नए शब्दों को चित्र-शब्दकोश/शब्दकोश में देखना.
  • भाषा की लय और तुक की समझ होना तथा उसका प्रयोग करना.
  • घर और विद्यालय की भाषा के बीच संबंध बनाना.

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