अपनी देख रेख कैसे करें

अपनी देख रेख कैसे करें

अपनी देख घर पर कर्तव्यः-

प्रत्येक छात्र/स्काउट/गाइड का प्रथम कर्तव्य है कि, वह अपनी जीवनचर्या को संयमित रखे। प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त (सूयोदय से पूर्व) में उठे। शौचादि से निवृत्त होकर दातून करे । तत्पश्चात् स्नान-ध्यान करे। स्वल्प जलपान कर स्वअध्ययन करे। समय पर भोजन ले। अपने कक्ष, बिस्तर तथा पुस्तकें व्यवस्थित रखे। अपने माता-पिता व बड़ों का सम्मान व अतिथि सम्मान करे। बड़े खड़े हों तो स्वयं बैठा न रहे, न जेब में हाथ डालकर बड़ों के सामने खड़े होवे। अपनी पढ़ाई के समय के अतिरिक्त घर के कार्यों में हाथ बटाए। पढ़ाई तथा दिनचर्या के लिए समय सारिणी बनाकर उसी के अनुसार पढ़ाई करे।

आजकल बच्चे अधिकतर मोबाइल तथा टी. बी पर व्यर्थ में समय गंवाते हैं। किंतु इस कार्य के लिए भी समय निश्चित हो। सांयकाल खुले मैदान में कोई न कोई खेल खेलकर स्वास्थ्य लाभ करे। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे कृषि-कार्य में परिश्रम कर सकते हैं। घर तथा आस-पास की स्वच्छता एवं सौंदर्गीकरण में अपना सक्रिय योगदान दे जैसे फूलों में पानी देना, किचन गार्डन में साग भाजी उगाना आदि।

उपरोक्त जीवन यापन करने वाले बच्चे स्वस्थ्य, कुशाग्र और सबके आँख के तारे बन जाते हैं। विशेषकर गाइड को भोजन, चाय, कॉफी बनाना, परोसना, पानी का भण्डारण, सब्जी की सुरक्षा व उसे काटना, कपड़े धोना, उन पर प्रेस करना, घर का बजट बनाना आदि कायों में माता-पिता की सहायता करनी चाहिए क्योंकि यह सब कार्य उनके भावी जीवन के लिये आदत बन जाते हैं।

बिस्तर:-

किसी घर के अनुशासन को देखना हो तो, वहाँ बिस्तर, बैठक, स्नानागार, किचन आदि सुव्यवस्थित करते हैं। इसलिए चारपाई छोड़ते ही अपना बिस्तर ठीक कर लें। उसकी को देखकर जाना जा सकता है।

किसी बच्चे का अनुशासन देखना हो तो उसके बिस्तर से साफ हो जाता है। बच्चे न स्वयं बिस्तर लगाते हैं न प्रातः काल उसे चादर, तकिए यथा-स्थान हो । चादर में सलवटें न हों, उसे चारों ओर से मोड़कर दवा देना चाहिए। जाड़ों में रजाई या कम्बल को ठीक प्रकार रोल कर पांव की तरफ रख दें।

सोते समय रजाई या कम्बल ही खोलना पड़ेगा शेष परिश्रम नहीं करना पड़ेगा। यह आदत नियमित होनी चाहिए।

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