सदमा (Shock) लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

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सदमा (Shock) लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

शरीर अथवा मस्तिष्क के आवश्यक कायों में व्याप्त उदासीनता की दशा को सदमा कहते हैं । यह रुधिर संचार व्यवस्था में अव्यवस्था का परिणाम है।

कारण -आन्तरिक या बाह्य रक्त-स्त्राव, अस्थि-भंग, दबने, डूबने, जलने, झुलसने, विषपान या सर्पदंश आदि से सदमा होता है।

लक्षण -रोगी ठण्ड का अनुभव करता है, शरीर ठण्डा व पसीने से तर हो जाता है। होंठ व चेहरा पीला पड़ जाता है। वह बैचेनी का अनुभव करता है, नाड़ी मंद चलती है तथा सांस तेज हो जाती है, जीभ सूख जाती है। गम्भीर सदमे की स्थिति में रोगी अचेत हो जाता है।

उपचार -सर्व प्रथम सदमे का कारण जानना चाहिए। यदि रक्तस्त्राव हो रहा हो तो उसे रोकने का प्रयास करें। यदि रोगी अचेत न हो तो उसे चित्त लिटाकर सिर को शरीर के स्तर से कुछ नीचे व पैरों को ऊपर रखें। कपड़ों को ढीला कर दें और पसीना पोंछ दें। जीभ सूखने पर पूंट-घूट कर पानी या बर्फ के टुकड़े दें। रोगी को सांत्वना दें और यथाशीघ्र औषधालय पहुँचाने की व्यवस्था करें।

बिजली का सदमा ( Electric Shock)-

किसी व्यक्ति को बिजली का सदमा लगने पर सर्वप्रथम विद्युतधारा को अलग करें। मेन स्विच बन्द कर दें। यदि रोगी विद्युत तार पर चिपका हो तो सावधानी से किसी कुचालक वस्तु जैसे-सूखी लाठी, कागज का बन्डल आदि से उसे तार से अलग करें। यदि कृत्रिम सांस देने की आवश्यकता हो तो दें। रोगी को यथा शीघ्र औषधालय पहुँचाने की व्यवस्था करें।
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