गर्मी लगने (Heat Exhaustion) और लू लगने (Sun-Stroke) से कैसे बचें

लू लगना (Sun-Stroke) )

हमारे शरीर का तापमान लगभग 36.7° सेन्टीग्रेड या 98.4 फौरनहाइड रहता हैं। ग्रीष्म ऋतु में जब अत्यधिक गर्म हवायें चलने लगती है जिनमें नमी कम हो जाती है और तापमान 37.2 से. या 99° फैरनहाइट से अधिक हो जाता है तो धूप में चलने से व्यक्ति का तापमान भी तीव्रता से बढ़ जाता है। रोगी को थकावट, सिरदर्द, जी मचलाना, गिर पड़ना आदि लक्षण होते हैं । अतः ऐसे रोगी को ठंडे स्थान पर पीठ के बल लिटा दें। अनावश्यक वस्त्र उतार दें। रोगी के शरीर पर पानी का छिड़काव करें। सिर थोड़ा ऊँचा रखें। धड़ के ऊपर गीले तौलिये से बार-बार शरीर पोछे। सीने व पीठ पर गीली पट्टी रखें। कच्चे आम को भूनकर पानी पिलायें। नींबू की शिंकजी, प्याज का रस और पुदीने का पानी भी पिलाया जा सकता है।

गर्मी लगना (Heat Exhaustion)

गर्मी के दिनों में भीषण गर्मी के कारण यह स्थिति बनती है। चित कपड़े न पहनने, गर्म बन्द कमरे में जहाँ हवा का आगमन न हो अथवा आदमियों से भरे कमरे या गाड़ी में, ताजी हवा न मिलने वाली जगहों में काम करने वाले मजदूरों, सफर में जाने या परेड में उपस्थित होने वाले सिपाहियों को अधिकतर गर्मी लगने की शिकायत रहती है।

इसमें रोगी को चक्कर आने लगते है। सिर घूमने की शिकायत होती है, थकावट अनुभव होती है। चमड़ी गर्म और शुष्क हो जाती है। नाड़ी मंद पड़ जाती है। शरीर का तापमान कम हो जाता है। बेचैनी महसूस होती है। शरीर में पानी की मात्रा कम पड़ जाती है।

इसके बचाव के लिये हल्के और ढीले कपड़े पहनें अधिक मात्रा में पानी पियें, मरीज को ठण्डे स्थान पर ले जायें। सिर और गर्दन पर पानी डालें। पंखा हो तो पंखे से हवा करें। मूर्छा और कमजोरी का इलाज करें

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