मानचित्र (Maps) के कितने प्रकार होते हैं ?

मानचित्र (Maps)
“किसी चौरस सतह पर समस्त पृथ्वी अथवा उसके किसी अंश का सानुपातिक चित्रण मानचित्र कहलाता है।”

“A Map is a proportionate representation of the whole or part of earth’s surfece on a flat sheet of paper”

Cartography- (मानचित्र विज्ञान)-मानचित्रों एवं अन्य भौगोलिक उपकरणों की रचना संबंधी ज्ञान देने वाली विद्या को मानचित्र विज्ञान कहते हैं।
Map making was started 4000 Years back. मानचित्र बनाना, लिखना सीखने से पहले प्रारंभ हुआ, जब मनुष्य जंगली अवस्था में था उस समय संकेतों चिहों द्वारा मार्ग दर्शन करता था। रेड इण्डियन ऐंजटिक तथा एस्कीमों ने सर्वाधिक मानचित्र बनाये।
ग्रीक के निवासी आधुनिक मानचित्र के निर्माता कहलाते हैं। इनमें
यूरेटिस्थनीज तथा टॉलमी मुख्य थे ।
मध्य युग में 15वीं शताब्दी में व्यापार, यातायात, उद्योग आदि के विकास से मानचित्र कला की उन्नति हुई। स्कूल स्थापित किये गये-जिसमें 1. एटलियन, 2-फ्रेंच, 3-डच, 4- इंगलिश, 5-जर्मन प्रमुख थे।
भारत में मानचित्र कला का विकास 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। भारतीय व्यापारी नौकाओं तथा जलयानों द्वारा दूसरे देशों में जाते थे। चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल में एक सर्वेक्षण किया गया था। अकबर के शासन काल में राजा टोडरमल ने भूमि की नाप की थी।

मानचित्र निम्न प्रकार के होते हैं-
1. अचल सम्पत्ति के मानचित्र (Cadestral) -इसमें मकान, बाग, खेत, जागीर आदि आते हैं। ये मानचित्र -3″ = 1 मील के मापक पर बनाये जाते हैं।
2. धरातलीय विवरण मानचित्र (Topographical Map) -इसमें धरातल का विवरण जैसे-पर्वत, नदियाँ, झीलें, कुएँ, तालाब, मन्दिर, झरणें आदि दर्शाये जाते हैं। ये मानचित्र 1″ = 1 मील या कम से मापक पर दर्शाये जाते हैं।
3. दीवार मानचित्र (Wall Maps) -इसके अंतर्गत विश्व अथवा उसके किसी भूभाग को दर्शाया जाता है। ये 1″ = 16 मील के मापक पर बनते हैं।
उपरोक्त के अतिरिक्त विभिन्न उद्देश्यों के लिये अनेक प्रकार के मानचित्र होते हैं .

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply