स्काउटिंग/गाइडिंग का इतिहास

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स्काउटिंग/गाइडिंग का इतिहास

स्काउट शब्द का अर्थ है गुप्तचर या अग्रगामी ।

सेना में एक ऐसी कड़ी काम करती है जो फौज के आगे-आगे चलकर अपनी सेना का मार्गदर्शन करती है। तथा शत्रु सेना क गुप्त भेदों की जानकारी प्राप्त कर अपने अधिकारियों को देती है। उन्हें ही वहां स्काउट कहते हैं।
सार्वजनिक जीवन में स्काउटिंग ‘सेवा’ का पर्याय बन चुकी है। आज यह आंदोलन विश्व स्तर पर समाज सेवी संस्था के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।


स्काउटिंग के संस्थापक लार्ड बेडन पावल थे।उनका जन्म 22 फरवरी 1857 को इंग्लैंड में हुआ।वे सन् 1876 में सैनिक परीक्षा में सफल हाकर एक फौजी अफसर (सब लेफ्टिनेंट)बनकर भारत में आए। भारत में उन्होनें स्काउटिंग के अनेक प्रयोग किए और इसके आधार पर ‘एड्स टू स्काउटिंग'” नामक पुस्तक लिखी ।


सन् 1899-1900 में दक्षिण अफ्रीका के बोअर युद्ध बोअर जाति के दमन का काम एडवर्ड सिसिल व बेडन पावल को सौंपा गया। अंग्रेजों के पास वहां सेना बहुत कम थी। एडवर्ड सिसिल ने मेफकिंग नगर के कुछ लड़कों को प्राथमिक सहायता ,शत्रु का भेद निकालना,संदेश भेजना,सुरक्षा आदि की ट्रेनिंग देकर विभिन्न कार्यों में लगा दिया और प्रशिक्षित सैनिकों को लड़ने के लिये मोर्चे पर भेज दिया। इस योजना से अंग्रेज विजयी हुए। इस घटना से बेडन पावल बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने सोचा यदि यही प्रशिक्षण शांतिकाल में बालकों को दिया जाये तो हमारे बालक अधिक जागरूक, साहसी, स्वस्थ व कर्तव्य परायण बन सकते हैं।


           इसी योजना को व्यावहारिक रूप देने के लिये बेडन पावल ने 20 बालकों को लेकर प्रथम प्रायोगिक शिविर 29 जुलाई से 9 अगस्त 1907 तक ब्राउन-सी द्वीप ( इंग्लैंड ) में आयोजित किया। इस शिविर के अनुभवों व कैम्प फायर की कहानियों को पहले जनवरी से मार्च 1908 तक छ: पाक्षिक भागों में, फिर 1 मई 1908 को ‘स्काउटिंग फॉर बॉयज’ के रूप में प्रकाशित किया गया। इसके बाद यह स्काउट आंदोलन विश्व के कोने-कोने में फैलने लगा। भारत में सन 1909 में कैप्टन बेकर ने अंग्रेज बच्चों के लिए बैंगलोर में स्काउट दल खोला। इसमें केवल अंग्रेज व एंग्लोइण्डियन बच्चे ही भाग ले सकते थे। 1915-16 में श्रीमती एनीबेसेन्ट एवं डॉ. अरूणडे के प्रयासों से मद्रास में इंडियन बॉयज स्काउटएसोसिएशन की स्थापना हुई।


               भारतीय बच्चों के लिए भारत में सर्वप्रथम 1913 में श्री राम बाजपेयी ने शाहजहाँपुर (उ.प्र.) में एक स्काउट दल खोला। सन् 1918 में पं. मदन मोहन मालवीय के सुझाव व सहयोग से श्रीराम बाजपेयी व डॉ. हृदयनाथ कुंज ने प्रयाग,इलाहाबाद) में ‘सेवा समिति ब्वाय स्काउट एसोसिएशन’ की स्थापना की।


भारत में कई स्काउट व गाइड संगठन अलग -अलग काम करते रहे। आजादी के बाद 7 नवम्बर 1950 को ‘हिन्दुस्तान स्काउट एसोसियेशन’ और ‘द ब्वाय स्काउट एसोसियेशन’ मिलकर एक हो गये। इस नए संगठन का नाम ”भारतस्काउट्स एवं गाइड्स’ ‘ रखा गया। गर्ल गाइड एसोसिएशन इण्डिया अब भी अलग ही काम कर रही थी। 15 अगस्त 1951 को यह संस्था भी भारत स्काउट्स एवं गाइड्स में ही मिल गई। भारत में अब केवल यही संस्था केन्द्रीय व राज्य सरकारों द्वारा मान्य है।
भारत का स्काउट विभाग अन्तर्राष्ट्रीय स्काउट-संघ (WOSM, जेनेवा (स्विटजरलैण्ड) व गाइड विभाग विश्व गर्ल गाइड तथा गर्ल्स स्काउट संघ (WAGGGS), लन्दन से सम्बद्ध है। अमेरिका में गाइड को गर्ल स्काउट कहते हैं।

        भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का राष्ट्रीय मुख्यालय 16, महात्मा गांधी मार्गइन्द्रप्रस्थ इस्टेट नई दिल्ली में स्थित है। प्रत्येक राज्य की राजधानियों में स्काउट-गाइड के राज्य मुख्यालय बनाये गये हैं।

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