शाला में स्वास्थ्य शिक्षा [HEALTH EDUCATION IN SCHOOL]

शाला में स्वास्थ्य शिक्षा [HEALTH EDUCATION IN SCHOOL]

The health of a country’s people has traditionally, been measured by the rate at which they die; a decreasing death rate is taken as an indication of increasing health. In recent years, however, the concept of health has undergone significant changes. There is a new interest in one total qua- lity of life rather than merely the length of life, in the positive element of good health rather than merely the absence of disease and infirmity.

-Forrest E. Linder

स्वास्थ्य केवल बीमारी या अंग-विहीनता की अनुपस्थिति ही नहीं है वरन् शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कल्याण की पूर्ण दशा है। अतः स्वास्थ्य जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखद ढंग से जीवित रहने तथा सर्वोत्तम रूप से सेवा करने के योग्य बनाता है। जिस देश के नवयुवक शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक रूप से स्वस्थ होंगे, वह राष्ट्र सदैव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहेगा।

स्वास्थ्य व्यक्तिगत जीवन के लिए ही आवश्यक नहीं है वरन् राष्ट्रीय जीवन के लिए भी आवश्यक है। इसके अभाव में व्यक्ति का जीवन स्वयं अपने तथा समाज, दोनों के लिए भारस्वरूप बन जाता है।

स्वास्थ्य का अर्थ (MEANING OF HEALTH)

अंग्रेजी शब्द ‘Health’ ‘स्वस्थता’ की दशा (Condition of being hal’) के लिए प्रयुक्त किया जाता था जिसका अभिप्राय सुरक्षा तथा निरोगता से लिया जाता था। सामान्यतः स्वास्थ्य का अर्थ उस स्वस्थ दशा से लगाया जाता है जिसके द्वारा शरीर तथा मस्तिष्क के समस्त कार्य सुचारु रूप से सक्रियतापूर्वक सम्पन्न किये जाते हैं ।

स्वास्थ्य-शिक्षा का अर्थ (MEANING OF HEALTH EDUCATION)

स्वास्थ्य-शिक्षा स्वस्थ जीवनयापन के नियमों का छात्रों को ज्ञान कराने का एक ढंग है। विभिन्न विद्वानों ने इसको विभिन्न दृष्टिकोणों से परिभाषित किया है। डॉ० थामस डी० वुड ने इसको व्यक्ति के जीवन-अनुभवों के रूप में परिभाषित किा है। उसने लिखा है-“स्वास्थ्य-शिक्षा उन अनुभवों का योग है जो व्यक्ति, समुदाय तथा प्रजाति के स्वास्थ्य से सम्बन्धित आदतों, वृत्तियों तथा ज्ञान को प्रभावित करते हैं।

वुड ने इस परिभाषा में व्यक्ति के उन जीवन-अनुभवों की ओर संकेत दिया है जो इन तथ्यों को प्रभावित करते हैं-वह क्या जानता है, वह किस प्रकार अनुभव करता है तथा वह क्या करता है ? ‘ग्राउट’ ने स्वास्थ्य-शिक्षा को सामुदायिक क्रिया तथा सामुदायिक उद्देश्य के रूप में परिभाषित किया है। उसने लिखा है-“स्वास्थ्य शिक्षा शैक्षिक प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति तथा समुदाय के स्वास्थ्य-सम्बन्धी व्यवहार के विषय में जो कुछ ज्ञान है उनका अनुवाद है। इस परिभाषा द्वारा स्वस्थ व्यवहार उचित निर्देश तथा प्रभावकारी प्रेरणा पर बल दिया गया है।

स्वास्थ्य शिक्षा का क्षेत्र (SCOPE OF HEALTH EDUCATION)

स्वास्थ्य-शिक्षा का क्षेत्र बहुत व्यापक है। सामान्यतया इसके क्षेत्र के अन्तर्गत बालकों के स्वास्थ्य का संरक्षण, उनके स्वास्थ्य में उत्पन्न विभिन्न दोषों एवं बीमारियों की खोज एवं उनका निराकरण तथा उनके स्वास्थ्य की वृद्धि के लिए उन्हें स्वास्थ्य सम्बन्धी नियमों आदि से अवगत कराना निहित है अतः शिक्षा के क्षेत्र में व्यक्तिगत स्वास्थ्य, शारीरिक शिक्षा, स्वास्थ्य-विज्ञान तथा सामुदायिक स्वास्थ्य से सम्बन्धित तथ्यों के ज्ञान की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य (AIMS OF HEALTH EDUCATION)

शाला में स्वास्थ्य शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बालकों को यह सिखाना है कि-

(1) वे किस प्रकार स्वस्थ रह सकते हैं।

(2) इसके साथ ही यह भी सिखाना है कि वे स्वास्थ्य के स्तर को किस प्रकार उच्च बना सकते हैं।

स्वास्थ्य शिक्षा उक्त बातों के लिए उनको सन्तुलित भोजन, जल तथा शुद्ध वायु, प्रकाश एवं व्यायाम सम्बन्धी नियमों का ज्ञान तथा वैज्ञानिक एवं प्रभावशाली ढंग से जीवन व्यतीत करने के लिए अच्छी आदतों के निर्माण पर बल देती है।

इन उद्देश्यों के अतिरिक्त स्वास्थ्य-शिक्षा के निम्नलिखित अन्य उद्देश्य भी महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं-

  • छात्रों को दुर्घटनाओं एवं विभिन्न बीमारियों के कारण एवं उनके दूर करने के उपायों के विषय में अवगत कराना।
  • शिक्षकों तथा विद्यालय के अन्य कर्मचारियों के स्वास्थ्य को भी उन्नत बनाने में सहायता देना।
  • अभिभावकों एवं समाज के अन्य सदस्यों को स्वास्थ्य सम्बन्धी नियमों एवं सिद्धान्तों से अवगत कराना जिससे वे स्वयं अपने स्वास्थ्य की वृद्धि कर सकें
  • अपने बालकों के स्वास्थ्य को उत्तम बनाने के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण कर सकें।

स्वास्थ्य शिक्षा का मुख्य उद्देश्य-

बालकों को स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए विद्यालय में उपयुक्त व्यवस्था करना है। इसके लिए बालकों में विभिन्न आदतों एवं रुचियों का विकास होना चाहिए। शिक्षक इनके विकास में बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्य कर सकता है। स्वच्छता-सप्ताह, स्वास्थ्य-सप्ताह को मनाने से बालकों में समाज-सेवा एवं श्रम के प्रति आदर की भावना का विकास किया जा सकता है। वास्तव में स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्यक्रमों के द्वारा विद्यालय के सम्पूर्ण वातावरण को स्वस्थ जीवन का प्रेरक बनाया जा सकता है।

शाला में स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम

अमरीका की विद्यालय स्वास्थ्य-शिक्षा कार्यक्रम की समिति ने स्वास्थ्य-शिक्षा कार्यक्रमों को इन शब्दों में परिभाषित किया है-“स्वास्थ्य-सेवाएँ स्वस्थ जीवनयापन तथा स्वास्थ्य-शिक्षा आदि विद्यालय प्रक्रियाएँ, जो बालकों तथा विद्यालय अधिकारियों के स्वास्थ्य की स्थापना तथा उन्नति के लिए योगदान देती हैं, वे विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम का निर्माण करती हैं। नीचे विद्यालय स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्यक्रमों को उपर्युक्त अनुसार तीन वर्गों में विभाजित करके उन पर प्रकाश डाला जा रहा है-

(अ) स्वास्थ्य-सेवाएँ

विद्यालय का एक महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य-छात्रों को समुचित स्वास्थ्य-सेवाएँ प्रदान करना है। स्वास्थ्य सेवा के अन्तर्गत वे सभी प्रक्रियाएँ निहित हैं जो बालक के स्वास्थ्य-स्तर को निर्धारित करती हैं और स्वास्थ्य की स्थापना एवं उसके संरक्षण में उसको सहयोग प्रदान करती हैं। साथ ही उसके दोषों से अभिभावकों को अवगत कराती हैं और बीमारियों को रोकती तथा दोषों को दूर करती हैं। व्यावहारिक रूप में स्वास्थ्य सेवाओं में डाक्टरी निरीक्षण तथा अनुवर्ती कार्य, स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की जानकारी तथा इस सम्बन्ध में सूचनाओं को लेखबद्ध करना, बालकों के विषय में शिक्षकों की रिपोर्ट, विद्यालय में भोजन एवं जल तथा मूत्रालय एवं शौचालय की व्यवस्था निहित है।

(ब) स्वस्थ जीवनयापन

विद्यालय में स्वास्थ्य-शिक्षा के कार्यक्रम का दूसरा महत्त्वपूर्ण अंग स्वस्थ जीवनयापन है। एक अच्छे विद्यालय का महत्त्वपूर्ण दायित्व है कि वह एक स्वस्थ एवं स्वच्छ भौतिक वातावरण प्रदान करे जो पूर्णतः स्वास्थ्यप्रद हो। विद्यालय की स्थिति, शोरगुल, धुएँ. सीलन आदि अस्वास्थ्यप्रद दशाओं से मुक्त होनी चाहिए। विद्यालय-भवन के कक्ष, खेल के मैदान आदि स्वच्छ, आकर्षक एवं बालकों की अभिवृद्धि एवं विकास हेतु उपयुक्त हों। कक्षा-कक्षों में शुद्ध वायु, प्रकाश आदि की उपयुक्त व्यवस्था हो। इसके अतिरिक्त विद्यालय का फर्नीचर बालकों की आयु, कद आदि के अनुसार हो। अतः विद्यालय का सम्पूर्ण वातावरण बालकों के दृष्टिकोण से उपयुक्त एवं स्वास्थ्यवर्द्धक होना चाहिए।

(स) शाला में स्वास्थ्य सम्बन्धी शिक्षा

विद्यालय का यह भी उत्तरदायित्व है कि वह प्रत्येक बालक को उत्तम स्वास्थ्य स्थापित करने की आवश्यकता से अवगत कराए। बालकों का उत्तम स्वास्थ्य क्या है और किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है, बीमारियों से किस प्रकार बचा जा सकता है-आदि के विषय में जानना अत्यन्त आवश्यक है। इनके अतिरिक्त उन्हें पौष्टिक भोजन तथा सफाई के महत्त्व और मानसिक एवं संवेगात्मक विषयों से भी अवगत होना परमावश्यक है। इन समस्त बातों का ज्ञान स्वयं बालक के लिए ही लाभप्रद नहीं है, वरन् समस्त समुदाय एवं राष्ट्र के लिए भी लाभप्रद है। यह ज्ञान स्वास्थ्य-शिक्षा के व्यवस्थित कार्यक्रमों द्वारा प्रदान किया जा सकता है।

शारीरिक विज्ञान तथा स्वास्थ्य विज्ञान में प्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य सम्बन्धी निर्देश प्रदान किए जा सकते हैं । भौतिक एवं जीव-विज्ञान, गृह-विज्ञान, सामाजिक विज्ञान आदि को शिक्षा के साथ मानिसक एवं संवेगात्मक स्वास्थ्य के प्रकरणों पर विशेष व्याख्यानों का प्रबन्ध किया जा सकता है। स्वास्थ्य-शिक्षा के कार्यक्रम बालकों को मानव शरीर के ढाँचे एवं उसकी क्रिया-प्रणाली के ज्ञान के साथ उन्हें स्वयं को शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक तथा नैतिक रूप से ठीक रखने की आवश्यकता की अनुभूति करने योग्य बनायेंगे। स्वास्थ्य निर्देशन के पाठ्यक्रम में भोजन, जलवायु, व्यायाम, मनोरंजन, नींद, शरीर के अंग एवं उनकी क्रिया-प्रणाली, असामान्य दशाओं एवं बुरी आदतों का स्वास्थ्य पर प्रभाव, बीमारियों के कारण, लक्षण एवं उन्हें दूर करने के उपाय, प्राथमिक सहायता आदि को स्थान मिलना चाहिए।

स्वास्थ्य शिक्षा प्रायः व्याख्यान या भाषण देकर एवं विभिन्न प्रकार की मुद्रित सामग्री का प्रयोग करके प्रदान की जाती है, परन्तु रेडियो कार्यक्रम का उपयोग एवं नाटकों का आयोजन तथा फिल्म दिखाकर, नुमायश लगाकर एवं स्वास्थ्य-सप्ताह मनाकर स्वास्थ्य- शिक्षा को अधिक रुचिकर बनाया जा सकता है।

स्वास्थ्य-शिक्षा को प्रदान करने का महत्त्वपूर्ण साधन वातावरण भी है। अतः इसको प्रदान करने के लिए घर, विद्यालय एवं समाज में स्वास्थ्यप्रद वातावरण का निर्माण किया जाय तो उद्देश्य की प्राप्ति सरल हो सकती है।

शाला में स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम में प्रधानाचार्य का कार्य-भाग

स्वास्थ्य-शिक्षा कार्यक्रम के सम्बन्ध में प्रधानाचार्य का सबसे महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व यह है कि वह विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम में भाग लेने वाले विभिन्न विभागों के कार्य में समन्वय स्थापित करे। इसके लिए वह ऐसी प्रशासकीय प्रक्रियाओं को स्थापित करें जिनके द्वारा शारीरिक शिक्षा का शिक्षक, विद्यालय डाक्टर एवं नर्स, मानसिक स्वास्थ्य-वैज्ञानिक अपने प्रयासों में सफल हो सकें। प्रधानाचार्य स्वास्थ्य-शिक्षा के शिक्षण को पूर्णतः लाभप्रद बनाने के लिए शिक्षकों को उपयुक्त सामग्री प्रदान करे।

वह स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए सामयिक स्वास्थ्य-पर्यवेक्षण कराये तथा संक्रामक रोगों को विद्यालय में फैलने से रोकने के लिए कार्य करे। इस कार्य में वह विद्यालय के स्वास्थ्य-शिक्षा कार्यक्रम से सम्बन्धित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सहयोग ले सकता है। उसे बालकों के माता-पिता तथा समुदायों के लोगों का भी सहयोग प्राप्त करने के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य करना चाहिए।

जैसा कि हम ऊपर देख चुके हैं, विद्यालय में स्वास्थ्य-शिक्षा उन प्रक्रियाओं एवं अनुभवों का योग है जो कि व्यक्ति, समुदाय तथा जाति के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए प्रधानाचार्य का यह भी कर्तव्य है कि वह स्वास्थ्य-शिक्षा कार्यक्रम की सफलता के लिए समाज के विभिन्न साधनों का प्रयोग करे; जैसे-सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से, समाज के अन्य व्यक्तियों से, जो स्वास्थ्य-शिक्षा से सम्बन्धित हैं, यथासम्भव सहायता प्राप्त करे।

वह बालकों के माता-पिता का सहयोग प्राप्त करके बालकों के स्वास्थ्य के विषय में महत्त्वपूर्ण कार्य कर सकता है। प्रत्येक विद्यालय में कुछ ऐसे बालक ध्यानाकर्षण करते हैं, जो सुस्त तथा बाल्यकाल की स्फूर्ति से वंचित दिखाई देते हैं, जो कक्षा में उदासीन रहते हैं, जो खेल-कूद में भाग लेने से जी चुराते हैं। ऐसे बालकों के माता-पिता से मिलकर स्थिति की जाँच करना प्रधानाचार्य का कर्तव्य है। घर के भौतिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक वातावरण का बालक पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

भौतिक वातावरण का मुख्य अंग है-भोजन। यदि बालक को उचित भोजन नहीं मिलता तो उसके स्वास्थ्य पर, उसकी रुचियों, क्रियाओं आदि पर अवश्य कुप्रभाव पड़ेगा। बालक जैसा भोजन खायेगा वैसा ही वह बनेगा। प्रधानाचार्य को चाहिए कि इस विषय में सम्भव उपाय प्रयोग में लेकर बालकों के लिए घर के आहार तथा स्कूल मध्यान्ह भोजन को सन्तुलित बनाने की व्यवस्था कराये।

Educationdepart.com एक ऐसा वेब पोर्टल है जिसमें शिक्षा से सम्बंधित दस्तावेजीकरण, महत्वपूर्ण आदेशों, निर्देशों, उपलब्धियों या इससे जुड़े हुए हर प्रकार की गतिविधियों का साझा किया जाता है ताकि शिक्षा विभाग के क्रियाकलापों से आपका साक्षात्कार हो सके. आप हमसे जुड़कर अपनी बात रख सकें या अपडेट रहें, इस हेतु नीचे के सोशल मीडिया से लिंक/बटन दबाएँ .

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply