खेल व उनके प्रकार

खेल व उनके प्रकार

खेलना बच्चे की जन्मजात प्रवृति है। खेलों से उसका शारीरिक, मानसिक व चारित्रिक विकास होता है। खेलों से बच्चों में अनेक सद्गुणों का विकास होता है. जैसे-उत्तम स्वभाव, खिलाड़ी भावना का विकास, एकता की भावना, सहनशीलता. अनुशासन, निःस्वार्थ भाव, नियमों का पालन करने की क्षमता, आत्म-नियंत्रण, नेतृत्व शक्ति का विकास आदि। स्काउट/गाइड शिक्षा भी एकखल है। खेल-खेल में स्काउट/गाइड जीवनोपयोगी अनेक बातें सीख जाते हैं। खेलों में मनोरंजन और शिक्षा का ऐसा सामंजस्य रहता है कि, स्काउट/गाइड उनमें आनन्द की अनुभूति प्राप्त करते हैं। स्काउटिंग के जन्मदाता लार्ड बेडन पावेल ने भी स्काउटिंग को एक खेल, किन्तु शैक्षिक खेल कहा है। अतः स्काउट/गाइड शिक्षा में खेलों का एक विशिष्ट स्थान है।


खेलों को अनेक श्रेणियों में बांटा जा सकता है। जिनमें से निम्नलिखित प्रमुख है :

1. सामान्य या दल के खेल (General or Troop Games) – दल में चुस्ती व फुर्ती लाने के लिये प्रारम्भ में ऐसे खेल को खिलाया जाता है। इससे उनमें अनुशासन आता है। प्रत्येक सदस्य को ऐसे खेल में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है। इस श्रेणी में संगठन, नियम व प्रतिज्ञा, सैल्यूट, हप, फुर्र, नीर-तीर इत्यादि खेल आ सकते हैं। इन्हें अधिकतर वृत्ताकार घेरे में खिलाया जाता है।

2. टीम के खेल (Team Games)-इन खेलों में दो टीमें बनती है। जैसे-रुमाल झपट, डॉजबॉल, पैटन टैंक, रस्सा कस्सी, कबड्डी, खो-खो तथा इन्डोर व आउट डोर सभी पाश्चात्य खेल इस श्रेणी में आ जाते हैं। इन खेलों से शारीरिक व मानसिक चैतन्यता प्रबल होती है।

3. झण्डी दौड़ के खोल (Relay Games)-अनेक टोलियों बनाकर जो खेल खेले जाते हैं, उन्हें झण्डी दौड़ के खेल कहा जाता है। इस श्रेणी में स्काउट/गाइड कौशल की टोलीवार प्रतियोगिताएं आ जाती है। सुरंग दौड़, बॉगल रिले, गाँठ प्रतियोगिता, कला प्रतियोगिता आदि खेल इसमें आ जाते हैं।

4. ज्ञानेन्द्रियों के खेल या किम गेम्स (Sense Training Games ) –
आँख, कान, नाक, जिव्हा, स्पर्श को सजग करने के लिये इन खेलों को खिलाया जाता है। स्काउटिंग में इन्हें ‘किम्स गेम’ का नाम दिया गया है। वस्तुओं को देखकर स्मरण करने के लिये 24 परिचित वस्तुओं को एक मिनट दिखाकर 2 मिनट में उन्हें लिखकर लाने को कहा जाता है। कम से कम 16 वस्तुओं के नाम लिखने वाले स्काउट/गाइड को स्तर से ऊपर (Above Standard) तथा कम को स्तर से नीचे (Under Standard) कहा जाता है। इसी प्रकार विभिन्न आवाजों को सुनने से कर्णेन्द्रिय, विभिन्न वस्तु को चखने से जिव्हा का, विभिन्न वस्तुओं को सुंघने से नासिका तथा छूने से स्पर्शेन्द्रिय के खेल कराये जा सकते हैं। इन खेलों का स्काउट गाइड के लिये महत्वपूर्ण स्थान है।

5. परीक्षण का खेल ( Test Games)- ये खेल प्रशिक्षण तथा पुनरावृत्ति के लिये खिलाये जाते हैं जैसे-गाँठे, बन्धन, पुल निर्माण, तम्बू तानना एवं भोजन पकाना आदि।

6. शान्त खेल (Quiet Games)- इन खेलों को कैम्प फायर से या भोजन के बाद बिना आवाज किये खेला जाता है जैसे-संदेश भेजना।

7. टोली खेल (Patrol Games)- इन खेलों को टोलियां अलग-अलग खेलती हैं जैसे-मोगली, शेर खाँ इत्यादि।
इस खेल में दल कम्पनी की चारों टोलियाँ अपने-अपने कॉर्नर पर जाकर खेलती है। लम्बे आगे छोटे पीछे कद से खड़े होकर जंजीर बनायी जाती है। आगे वाले की कमर दोनों हाथ गूंथकर मजबूती से पकड़ ली जाती है। उनमें से एक स्काउट/गाइड शेर खां बन जाता है। इस जंजीर को मोगली नाम दिया जाता है। अन्तिम खिलाड़ी की कमर पर पीछे से एक स्कार्फ पूंछ की तरह लटका दी जाती है। मोगली की पूंछ न पकड़े जा सके इसके लिये वे उससे बचते हैं, आगे का खिलाड़ी अपने हाथ फैलाकर उसे पूंछ की ओर न जाने देने के लिये प्रयास करता है। यदि शेर खां पूंछ पकड़ने में सफल हो जाता है तो उसे विजयी घोषित किया जाता है अन्यथा मोगली की विजय मानी जाती है।

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