भोजन के प्राप्ति के स्रोत व कार्य

भोजन की स्वच्छता परम आवश्यक है। भाज्य पदार्थ ठीक प्रकार से
पानी में धोकर पकाये और खाये जायें। खाना पकाने के बर्तन तथा खाना खाने का स्थान स्वच्छ हो। घर में गन्दगी जूता से आती है। अतः जूत बाहर अलग स्थान पर रखे जायें। मक्खी, मच्छर, चूह, काक्रोच आदि को भोज्य पदार्थों से दूर रखा जाये। खाना खाते समय हल्क व स्वच्छ वस्त्र धारण करना लाभकारी है। भोजन करने से पूर्व और बाद में साबुन से ठीक प्रकार से हाथ धोने तथा कुल्ला करना चाहिए।

भोजन हमारे शरीर को ऊष्मा तथा शक्ति प्रदान करता है। भोजन के आवश्यक तत्व हैं-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट्स, मिनरल्स, विटामिन एवं जल । इन तत्वों का संतुलित उपभोग स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है। इनकी प्राप्ति के स्त्रोत व कार्य निम्नवत है:-

भोजन के प्राप्ति के स्रोत व कार्य

प्रोटीन
स्त्रोत-दूध, अण्डा, गोश्त, मछली, मटर, दालें, तरकारी, सोयाबीन आदि।
कार्य – शरीर तन्तुओं का निर्माण और उनकी क्षतिपूर्ति करना।
* जीव द्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) का निर्माण करना।
पाचक रसों तथा नलिका विहीन ग्रन्थियों के रसों का निर्माण करना।
* शरीर में रोग निवारक शक्ति उत्पन्न करना।

कार्बोहाइड्रेट

तत्व – कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन 1:2 के अनुपात में
स्त्रोत
आलू, चावल, गेहूँ, ज्वार, मक्खन, साबूदाना, अखरोट, चीनी, मटर, गाजर आदि।
कार्य – शरीर को शक्ति व ऊष्मा देना।
यकृत ग्लूकोज को मधुजन में परिवर्तित कर देना।
* आवश्यकता पड़ने पर मधुजन को पुनः ग्लूकोज में परिवर्तित कर देना।

फैट्स/वसा या चिकनाई-

तत्व – कार्बन और 2:1 में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन।
स्त्रोत – घी, तेल, मक्खन, पनीर आदि।
कार्य-शरीर तथा मांसपेशियों को ऊष्मा प्रदान करना।

खनिज लक्षण (मिनरल्स)- ये दो प्रकार के होते हैं – कैल्शियम लवण व लौह लवण।

कैल्शिम लवण-
स्त्रोत- हरी तरकारी, संतरा, पनीर, दूध आदि।
कार्य – अस्थि निर्माण तथा दांतों के लिए आवश्यक है।
* स्नायुओं को शक्ति प्रदान करता है।

लौह लवण-

स्त्रोत- पालक, गाजर, हरी सब्जियाँ आदि।
कार्य- रक्त की लाल कोशिकाओं का बनाना।
* पित्त को शक्ति देना।

जल- शरीर में 70 प्रतिशत जल की मात्रा है। अतः जल पर्याप्त मात्रा में शरीर को प्रतिदिन मिलना चाहिए, एक दिन में लगभग 4 किलो जल लेना चाहिए। जल को भोजन के मध्य में तथा अन्त में कम लेना चाहिए। इससे भोजन की ऊष्मा कम हो जाती है। भोजन के दो-तीन घण्टे बाद खूब जल पीना चाहिए।
स्त्रोत- दूध, मट्ठा, फलों का रस, रसदार सब्जी व फल ।
कार्य-शरीर के तापमान को बढ़ने से रोकता है।

विटामिन:-ये जीवन दायक तत्व है। ये छः प्रकार के होते हैं:-A B C D E and K

विटामिन’A’

स्त्रोत – दूध, मक्खन, गाजर, टमाटर, पालक आदि।
कार्य- शरीर की वृद्धि, आँखों की रोशनी में वृद्धि, रोगों से बचाव तथा पाचन क्रिया में सहायक है। इसके अभाव में रतौंधी का रोग, त्वचा का शुष्क होना, यकृत की पथरी आदि रोग हो सकते हैं

विटामिन’B’

इस वर्ग में विटामिन B1 B2 B6 B12 विशेष हैं।
स्त्रोत – चावल के छिलके में विशेषकर होता है।
कार्य – पाचन शक्ति की स्थिरता व हृदय और मस्तिष्क की थकान रोकने में सहायक होते हैं। इसकी कमी से भूख कम लगना, चक्कर आना, बेरी-बेरी रोग तथा स्नायु दुर्बल हो जाते हैं।
विटामिन ‘C’
स्त्रोत- ताजे फल जैसे- नींबू, संतरा, मौसमी, अन्नानास, अकुरित दालें आदि।
कार्य- यह रक्त वाहिनियों को स्वस्थ रखता है, दाँतों को मजबूत करता है,
कोशिकाओं को एक जगह रखने में सहायक होता है तथा खासी, जुकाम, निमोनियाँ आदि से रक्षा करता हैं।

विटामिन’D

स्त्रोत-ऊषाकाल की सूर्य की किरण, दूध, मक्खन आदि।
कार्य-
– यह हड्डियों को मजबूत करता है सूखे की बीमारी तथा खाँसी से बचाता है

विटामिन E’

स्त्रोत -गेहूँ के अंकुर, पत्तीदार सब्जी आदि।
कार्य – यह प्रजनन क्रिया में सहायक है।

विटामिन’K
स्रोत – पालक, फूलगोभी, दूध आदि।
कार्य- चोट लगने पर रक्त को जमाने में सहायक है।

विटामिन की तुलना मकान बनाने वाले कारीगर से की जा सकती है। मकान बनाने के लिये पत्थर, रेत, ईट, सीमेन्ट, लोहा, लकड़ी, पानी आदि की आवश्यकता होती है किन्तु कारीगर के अभाव में मकान नहीं बन सकता। ठीक उसी प्रकार भोजन के आवश्यक तत्वों से रक्त मांस बनाने का कार्य विटामिन करते है। इनके अभाव में आदि भोजन-तत्व अछूते रह जाते हैं। अतः इन सभी तत्वों की एक निश्चित मात्रा प्रत्येक
व्यक्ति के लिये आवश्यक है। एक सस्ते पर संतुलित भोजन में विभिन्न तत्वों की मात्रा लगभग निम्न सारिणी के अनुसार होनी चाहिए। जिसमें देशकाल, मौसम, आयु के अनुसार थोड़ा बहुत अन्तर हो सकता है।

भार ग्राम में
पोषक तत्वों की मात्राएँ
खाद्य पदार्थ
क्लोरीज
कार्बोहाइड्रेट
प्रोटीन
2500 इकाई
450 ग्राम
75 ग्राम
अनाज
400
दाले
80
हरी सब्जियाँ
115
अन्य सब्जियाँ
80
घी/ तेल
25
दूध व दूध से बने पदार्थ 250
60
50 ग्राम
1.0 ग्राम
0.5मि.ग्रा.
वसा
कैल्शियम
फॉसफोरस
लोहा
विटामिन (A)
विटामिन (B)
विटामिन (C)
चीनी/गुड़
80
50 मि.ग्रा.
7500 आ.रा.ई
2.0 मि.ग्रा.
फल
200 ग्राम
सोगिक

भोजन करते समय निम्नलिखित बातों पर अमल करना चाहिए:-
1. भोजन :-देश-काल, ऋतु, आयु तथा आवश्यकतानुसार किया जाना चाहिए।
2. भोजन निश्चित समय पर करना चाहिए। एक, भोजन लगभग छः घण्टे में पच जाता है। अतः दूसरा भोजन छः घण्टे के अन्तराल पर अवश्य करना चाहिए, इससे पूर्व नहीं। भूख से अधिक खाने से पाचन शक्ति गड़बड़ा जाती है। भोजन खूब चबाकर खाना चाहिए। चटपटे, अधिक पके, मसालेदार व तेलयुक्त भोजन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं।
3. भोजन करते समय पालथी मारकर या कुर्सी पर बैठना चाहिए।
4. भोजन के बाद भली प्रकार कुल्ला करना चाहिए। दातुन करना भी श्रेष्ठ है। दोपहर के भोजन के बाद थोड़ा आराम – 8 साँस चित लेटकर, 16 दाहिनी करवट, 5-10 बांयी करवट लेटकर लेनी चाहिए। सायंकाल के भोजन के पश्चात् कुछ कदम (लगभग एक किलोमीटर) अवश्य घूमना चाहिए।
5. भोजन करते समय मन में उत्तम विचार लाना तथा बातें कम करनी चाहिए।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply