प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit)

प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की जानकारी प्रत्येक स्काउट/गाइड को प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की जानकारी होना नितान्त आवश्यक है।


प्राथमिक सहायता देने के लिये कुछ सामग्री की आवश्यकता पड़ती है । इस आवश्यक सामग्री को रखने के लिए बनाए गए बॉक्स को फस्ट एड किट कहते हैं

प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit)

प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit)
प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit)

किसी औसत प्राथमिक बॉक्स में निम्नलिखित वस्तुएं होनी चाहिए:-

1. गोल पट्टी (Roller Bandage) & 4 इंच चौड़ी 2 मीटर लम्बी-8 पट्टियाँ,

2. तिकोनी पट्टी (Triangular Bandage) : – 38″ (1 मीटर) का वर्गाकार सफेद व सस्ता कपड़ा लेकर उसे कर्णवत् काट कर किनारे की सिलाई कर दें। ऐसी-4 पट्टियाँ।

3. गॉज-1/2 इंच चौड़ी 4 इंच लम्बी पोलिथीन में रखी प्रेशरकुकर में उबालकर – गॉज।

4. चिकनी पट्टी3 इंच चौड़ी-12 पट्टियाँ।

5. गर्म पट्टी- 3 इंच चौड़ी-1 रोल।

6. कैंची-1

7. चिमटी-2

8. डिटोल की शीशी-1
9. सोफ्रामाइसीन ट्यूब-1
10. पोलिथीन में लिपटी हुई मोटी गॉज की गद्दियाँ-3
11. टिंचर आयोडीन या आयोडैक्स-2 डिबियां।
12. रुई का पैकेट-1

13. लिन्ट पाउडर-50ग्राम
14. एडेसिव प्लास्टर
15. एन्टी सैफटिक क्रीम या लोशन
16. (खपच्चियों) स्पिलिन्टस

17.सेफ्टी पिन -12
18. थर्मामीटर-1

19. ड्रापर -1
20. आइ-वॉश कप-1

21. नपना गिलास-1
22. सोडियम बाइकार्बोनेट या खाने का सोडा
24. सर्जिकल ब्लेड/साधारण ब्लेड
25. अन्य आवश्यक दवाइयाँ जैसे:-
-सादा नमक।
– पैरा सिटामौल
– हरा पोदीना
– ग्लूकोज
– इलैक्ट्रोल
– आई ड्राप व एयर ड्राप
-बरनौल
-टूनिकेट, साबुन, तौलिया आदि।

प्राथमिक सहायता (First Aid)

परिभाषा-दुर्घटना के समय डॉक्टरी सहायता मिलनेसे पूर्व घायल व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता को प्राथमिक सहायता कहते हैं.

प्राथमिक सहायक की आवश्यकता घरों, कारखानों, सड़क दुर्घटनाओं, प्राकृतिक प्रकोप जैसे-भूचाल, बाढ़, युद्ध, महामारी आदि में पड़ती है। एक प्राथमिक चिकित्सक के कार्यों को संक्षेप में तीन भागों में बांटा जा सकता है।:-

1. डॉक्टर के आने तक या रोगी को डॉक्टर के पास पहुंचाने तक रोग व तकलीफ को बढ़ने से रोकना।
2.रोगी का जीवन बचाना।
3. चिकित्सक के पास पहुंचाना।

प्राथमिक सहायक के गुण

एक कुशल प्राथमिक सहायक में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:-
*

  • उसमें नेतृत्व की क्षमता हो, वह साहसी हो, भीड़ नियंत्रण कर सके तथा स्थानीय आवश्यक सहायता ले सकें।
  • निरीक्षण शक्ति तीव्र हो ताकि रोग का कारण जान सके।
  • आत्मसंयम व शान्ति से काम करे तथा आतंक न मचाये।
  • रोग की प्राथमिकता के आधार पर उपचार करे।
  • व्यवहार कुशल हो। रोगी और उसके परिजनों को सांत्वना दे सके।
  • अपने कार्य में दक्ष हो।
  • प्रत्युत्पन्नमति तथा आत्म-विश्वासी हो अर्थात् सूझबूझ से काम ले सके।

प्राथमिक सहायता के स्वर्णिम नियम-

1. अति आवश्यक कार्य पहले करें। 

2. सबसे अधिक आवश्यकतावाले रोगी को पहले प्राथमिक सहायता दें।

 3. सांस रूकने वालेव्यक्ति को सबसे पहले कृत्रिम श्वास दें। उसके लिए प्रत्येक सैकिण्ड महत्वपूर्ण है। 

4. रक्त स्त्राव को तुरंत रोकें।

5. रोगी व उसकेपरिजनों को सान्त्वना दें। 

6. भीड़ को हटायें और रोगी को ताजी हवा आने दें। 

7. रोगी को अस्पताल पहुंचाने या डाक्टर को बुलाने की तुरन्त व्यवस्था करें। 

8. रोगी के घर पर भी सूचना भिजवाने की व्यवस्था करें। 

9. रोगी को गर्म रखें। 

10. घाव को ढक कर रखें।

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