योग साधना के विभिन्न आयाम(Different dimensions of yoga practice)

योग साधना के विभिन्न आयाम

 योग को चार भागों में बांटा गया है :

  • कर्मयोग, जहां हम अपने शरीर का उपयोग करते हैं;
  • भक्तियोग, जहां हम अपनी भावनाओं का उपयोग करते हैं;
  • ज्ञानयोग, जहां हम मन एवं बुद्धि का प्रयोग करते हैं और
  • क्रियायोग, जहां हम अपनी ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

 योग शिक्षा :

  • परंपरागत रूप से, परिवारों में ज्ञानी, अनुभवी एवं बुद्धिमान व्‍यक्तियों द्वारा और फिर आश्रमों में  ऋषियों / मुनियों / आचार्यों द्वारा योग की शिक्षा प्रदान की जाती थी।
  • ऐसा माना जाता है कि अच्‍छा, संतुलित, एकीकृत, सच पर चलने वाला, स्‍वच्‍छ, पारदर्शी व्‍यक्ति अपने लिए, परिवार, समाज, राष्‍ट्र, प्रकृति और पूरी मानवता के लिए अधिक उपयोगी होगा। योग की शिक्षा स्‍व की शिक्षा है।
  • आजकल, योग की शिक्षा अनेक मशहूर योग संस्‍थाओं, योग विश्‍वविद्यालयों, योग कालेजों, विश्‍वविद्यालयों के योग विभागों, प्राकृतिक चिकित्‍सा कालेजों तथा निजी न्‍यासों एवं समितियों द्वारा प्रदान की जा रही है।
  • अस्‍पतालों, औषधालयों, चिकित्‍सा संस्‍थाओं तथा रोगहर स्‍थापनाओं में अनेक योग क्‍लीनिक, योग थेरेपी और योग प्रशिक्षण केंद्र, योग की निवारक स्‍वास्‍थ्‍य देख-रेख यूनिटें, योग अनुसंधान केंद्र आदि स्‍थापित किए गए हैं।
  • योग की धरती भारत में विभिन्‍न सामाजिक रीति-रिवाज एवं अनुष्‍ठान पारिस्थितिकी संतुलन, दूसरों की चिंतन पद्धति के लिए सहिष्‍णुता तथा सभी प्राणियों के लिए सहानुभूति के लिए प्रेम प्रदर्शित करते हैं।
  • सभी प्रकार की योग साधना को सार्थक जीवन एवं जीवन-यापन के लिए रामबाण माना जाता है।

आइये हम सब योग को अपनाएं

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