कक्षा 6 संस्कृत सीखने की सम्प्राप्ति (Class 6 Sanskrit Learning Outcomes)

भारतीय संस्कृति के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु संस्कृत भाषा का ज्ञान परम आवश्यक है। वैदिक वाङ्मय से आज पर्यन्त साहित्य में अनेक विधाओं पर रचना हो रही है। संस्कृत भाषा अपनी प्राञ्जलता एवं सलोनी शैली से अन्य भाषा को सम्पुष्ट ही नहीं करती प्रत्युत ललाम बन जाती है। अतः विद्यालयीन शिक्षा के पाठ्यक्रम में संस्कृत भाषा का ज्ञान छात्रों के लिए अपरिहार्य है।

कक्षा 6 संस्कृत सीखने की सम्प्राप्ति (Class 6 Sanskrit Learning Outcomes)

  • श्लोकों के ध्वनियों का अनुश्रवण करते हुए सुनने के अनुभव से अपने ढंग से मौखिक अभिव्यक्ति कर सकेंगे।
  • गद्य/अनुच्छों के अरोह अवरोह, विराम चिह्न व बलाघात का बोध कर स्वानुभव से अभिव्यक्ति कर सकेंगे।
  • आडियो कैसेट्स का अनुश्रवण कर श्लोकों का सस्वर वाचन आरोह-अवरोह के अनुक्रम के साथ कर सकेंगे।
  • घर विद्यालय, गाँव, मेला आदि से संबंधित घटित वर्णनों को देखकर व सुनकर घटित वर्णन को गति देना।
  • गतिविधि पूर्वक बात करना तथा आदेश व निर्देश को समझ कर व्यवहार करना।
  • संस्कृत गीतों व पहेलियों को सुनकर व समझकर संस्कृत गीतों का सस्वर गायन कर सकेंगे अपने ढंग से पहेलियों की अभिव्यक्ति भी कर सकेंगे।
  • कठिन शब्दों को श्याम पट पर लिखकर अभ्यास कराने से लेखन कौशल विकसित होगा तथा अभिव्यक्ति क्षमता सतत बढ़ेगी।
  • संस्कृत में प्रसारित पत्र-पत्रिकाओं में निहित रस, छंद व अलंकारों को समझपूर्वक पढ़कर अपना सुझाव देना व टिप्पणी करने की क्षमता विकसित करना।

कक्षा 6 संस्कृत सीखने की सम्प्राप्ति

  • छात्रों को सामूहिक व व्यक्तिगत वाचन कराने (श्लोकों का) से सीखने की प्रवृत्ति विकसित होगा तथा वाचन कौशल का विकास होगा।
  • श्लोक व अनुच्छेदों में आए संधियुक्त पदों का विग्रह, विभक्ति वाचन के अभ्यास से विषय की अवधारणा सुदृढ़ बनेगी तथा व्याकरणगत कठिनाइयाँ हल हो सकेगी।
  • श्लोक व अनुच्छेद से संबंधित वाचन प्रतियोगिता से विषयगत समझ बेहतर बनेगी तथा छात्र पठन-पाठन की प्रक्रिया में गति यति लय का अनुभव कर सकेंगे।
  • श्लोक व अनुच्छेद का श्रुतलेख व अनुलेख के सतत अभ्यास से छात्र शुद्ध संस्कृत वाक्य लिख सकेंगे।
  • परिचित विषय- घर, कक्षा, विद्यालय, पर्व आदि पर संस्कृत में दस वाक्य का लेखन कर सकेंगे, जिससे संस्कृत लिखने की प्रवृत्ति बढेगी।
  • चित्र देखकर संस्कृत में दस वाक्य बनाना, इससे संस्कृत सम्प्रेषण कौशल का विकास होगा।
  • शब्द रूपों को श्याम पट लिखकर सतत अभ्यास से संस्कृत लेखन की प्रवृत्ति बढ़ेगी तथा छात्रों को कहाँ, कैसे विभक्ति व वचनों का प्रयोग करना हैं इसकी समझ बनेगी।
  • छात्र पाठगत संज्ञा व सर्वनाम के सतत् अभ्यास से क्रिया पदो के प्रयोग को जान सकेंगे तथा संज्ञा व सर्वनाम के साथ संख्याओं का सार्थक प्रयोग कर सकेंगे।
  • छात्र कारक/विभक्तियों को समझकर सार्थक संस्कृत के शब्द/वाक्य बोल सकेंगे व लिख सकेंगे।
  • छात्र धातु रूप को समझकर विभिन्न लकारों में (लट्, लुट, लङ्ग, लोट, विधिलिङ् लकारों) सही प्रयोग कर सकेंगे।
  • विद्यार्थी संधियों के लक्षणों को समझकर संधि एवं विच्छेद युक्त पदों का सार्थक प्रयोग कर सकेंगे।
  • छात्र लिङ्ग, वचन व पुरूषों को समझकर संस्कृत वाक्यों का सार्थक प्रयोग कर सकेंगे।
  • छात्र अव्यय को समझकर सार्थक प्रयोग कर सकेंगे।
  • छात्रों में मूल्यपरक समझ विकसित होगी जिसका प्रभाव व्यवहार में दिखेगा।

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