कक्षा तीसरी विषय – हिन्दी पाठ 2 सच्चा बालक

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कक्षा तीसरी विषय – हिन्दी पाठ 2 सच्चा बालक का सारांश

हिन्दी पाठ 2 सच्चा बालक

एक दिन विद्यालय का घंटा बजा।सब विध्यार्ती अपनी-अपनी कक्षाओं में चले गये।एक कक्षा में गणित के अध्यापक पहुँचकर बोले:”लड़कों! कल जो गणित के प्रश्न दिये गए थे, वे कर लाये क्या?जिसने नहीं किये हो, वह बैंच पर खड़ा हो जाए।”
धीरे-धीरे लड़के बैंच पर खड़े हो गये।सारी कक्षा में केवल एक ही लड़का गणित के प्रश्न पूरे करके लाया था।अध्यापक महोदय ने उसकी बहुत प्रशंसा की।
जो लड़के बैंच पर खड़े थे, उन्हें दण्ड दिया गया । वे सभी रोने लगे।उन लड़कों को रोता देखकर वह लड़का भी रोने लगा जो प्रश्न निकाल कर लाया था।
अध्यापक ने पूछा, “भाई! तुम क्यों रोते हो? मैंने तुम्हें तो दण्ड नहीं दिया।”
वह लड़का बोला, “गुरूजी! ये गणित के प्रश्न मैंने अपने आप नहीं किये।बड़े भाई से करवाये थे।”
लड़के की सच्चाई सुनकर अध्यापक महोदय प्रसन्न होकर बोले, – “बेटा! तुम बड़े होकर अपने परिवार का नाम चमकाओगे – यह मेरा आशीर्वाद है।
गुरूजी का आशीर्वाद फल लाया।उस लड़के ने बड़े होकर बहुत नाम कमाया।उसने तन, मन, धन से देश की सेवा की।वह सत्यवादी बालक गोपाल कृष्ण गोखले के नाम से प्रसिद्द  हुआ।

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