भारत में स्काउटिंग गाइडिंग

भारत में स्काउटिंग गाइडिंग

भारत आंग्ल शासनाधीन होने के कारण ज्यों-ज्यों इंग्लैण्ड में स्काउटिंग का प्रसार बढ़ता गया, यहां भी ऐंग्लो-इण्डियन बच्चों के लिये स्काउटिंग शुरू की गई। 1909 में कै. टी. एच. बेकर ने बॉय स्काउट एसोसिएशन गठित कर बंगलौर में पहला स्काउट दल बनाया। 1910 में कै. टी. टोड, मेजर डब्लू, पी. पैकनहम, कर्नल जे. एस. विलसन, सर एल्फेड पिकफोर्ड आदि ने भी पुणे, जबलपुर, कलकता आदि में स्काउट दल खोले। 1913 में विवियन बोस ने मध्य भारत में स्काउटिंग प्रारम्भ की। 1915 में डॉ. (मिसेज) एनीबेसेन्ट तथा डॉ. अरुन्डेल ने मद्रास में इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना कर दल खोले । उधर 1918 में पं. मदनमोहन मालवीय के सुझाव, पर पं. श्री राम बाजपेयी ने पंडित हृदयनाथ कुंजरु के सहयोग से इलाहाबाद में बालचर सेवा समिति दल का श्री गणेश किया। बाद की मुख्य घटनाएं आगे प्रस्तुत की गई है।

1909 में क्रिस्टल पैलेस लन्दन की घटना से प्रभावित होकर बी. पी. ने 1910 में अपनी बहिन मिस एग्नेस बेडन पावेल की सहायता से गाइडिंग का श्री गणेश किया। 1911 में भारतीय संस्थाओं में भी गाइडिंग प्रारम्भ हो गई। 1912 में बी. पी. ने मिस ओलेव सेन्ट क्लेयर सोम्स से शादी की, तभी से लेडी बी. पी. ने भी गाइडिंग के प्रसार में अपनी अहम् भूमिका निभाई, 1930 में वह विश्व चीफ गाइड बनीं। 7 नवम्बर, 1950 में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स संगठन की नींव पड़ी। 15 अगस्त, 1951 को गाइड संगठन का पूर्णतया विलीनीकरण हो गया। तब से देश में एकमात्र “भारत स्काउट्स एवं गाइड्स” संगठन कार्यरत है। भारत में स्काउटिंग गाइडिंग की तिथि वार मुख्य मुख्य घटनाएं निम्न प्रकार रही:-

  • 1909 के. टी. एच. बेकर ने बंगलौर में बॉय स्काउट एसोसिएशन बनाया तथा पहला स्काउट दल खोला।
  • 1910- के. टी. टोड ने किरकी (पुणे), मेजर डब्लू. पी. पैकनहम वाल्स ने जबलपुर में दल खोले । कर्नल जे. एस. विल्सन तथा सर एल्फेड पिकफोर्ड ने कलकत्ता में स्काउटिंग आरम्भ की।
  • 1913-विवियन बोस (Vivian Bose) ने भारतीय बच्चों के लिये मध्य भारत के प्रदेशों में स्काउटिंग शुरू की।
  • 1915- डॉ. (मिसेज) ऐनी बेसेन्ट तथा डॉ. अरुन्डेल ने मद्रास में ‘इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन’ की स्थापना की। बंगाल में भी भारतीय लड़कों के लिये स्काउटिंग शुरू की गई।
  • 1916- “बॉय स्काउट ऑफ इण्डिया एसोसिएशन” का मद्रास में गर्वनर ने उद्घाटन किया।
  • 1918 -पं. मदन मोहन मालवीय के सुझाव पर श्री राम बाजपेयी ने पं. हृदयनाथ कुंजरु के सहयोग से इलाहाबाद में बालचर सेवा समिति का श्री गणेश किया।
  • 1919- 1 दिसम्बर, 1919 को “सेवा समिति स्काउट एसोसिएशन” की स्थापना इलाहाबाद में की गई जिसका संरक्षक उत्तर प्रदेश के गवर्नर को बनाया गया। अब सारे देश में स्काउटिंग का जाल बिछ चुका था।
  • 1921-बी. पी. युगल ने भारत का दौरा किया। वे जहां-जहां गये रैलियां की गई। इलाहाबाद, जबलपुर, लखनऊ, रांची, मद्रास में रैलियां हुई “दक्षिण भारतीय स्काउट संगठन” और “इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन” का एकीकरण हो गया किन्तु “सेवा समिति स्काउट एसोसिएशन” अलग बना रहा।
  • 1937- प्रथम अखिल भारतीय जम्बूरी दिल्ली में आयोजित की गई जिसमें बी. पी. युगल को आमंत्रित किया गया।
  • 1938- एकीकरण का पुनः प्रयास किया गया। बॉय स्काउट एसोसिएशन के अतिरिक्त शेष संगठन एक हो गये। इनका नया नाम ‘द हिन्दुस्तान स्काउट एसोसिएशन’ पड़ गया।
  • 1947-स्काउट और गाइड संगठन को एक करने का प्रयास हुआ।
  • 1949-9 मई को सरकारी भवन (Present Rashtrapati Bhawan) में मीटिंग में भारत स्काउट्स और गाइड्स ध्वज स्वीकृत किया गया।
  • 1950- बॉय स्काउट्स एसोसिएशन इण्डिया, द हिन्दुस्तान स्काउट्स एसोसिएशन तथा अन्य एसोसिएशन का नया नाम 7 नवम्बर, 1950 को “भारत स्काउट्स एवं गाइड्स’ रखा गया।
  • 1951- 15 अगस्त, 1951 को गर्ल गाइड्स एसोसिएशन का पूर्णतया विलीनीकरण हो गया। तब से भारत में मात्र एक ही अधिकृत संगठन ‘भारत स्काउट्स एवं गाइड्स’ कार्यरत है जिसका राष्ट्रीय मुख्यालय, लक्ष्मी मजुमदार भवन, 16, महात्मा गाँधी मार्ग, इन्द्रप्रस्थ एस्टेट, नई दिल्ली-110002 में स्थित है।

भारत में स्काउटिंग के प्रणेता

पं. मदन मोहन मालवीय-

  • पं. मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर 1861 को इलाहाबाद में पं. ब्रजनाथ जी के घर पर हुआ।
  • मालवीय जी एक कुशल राजनीतिज्ञ शिक्षाविद व स्वतंत्रता सेनानी थे। स्वतंत्रता आन्दोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
  • मालवीय जी 1909 से 1918 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।1912 में सैन्ट्रल लेजिस्लेटिव एसेम्बिली के सदस्य रहे।
  • इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की ।उपनिषद का मंत्र ‘सत्यमेव जयते’ मालवीय जी के प्रचार-प्रसार के कारण भारत का आदर्श वाक्य बना।
  • मालवीय जी के सम्मान में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया। मालवीय जी को भारत सरकार ने पदम् भूषण व भारत रत्न अवार्ड से सम्मानित किया।
  • 1918 म प . मदन मोहन मालवीय जी के सझाव पर ही पं. श्रीराम बाजपेयी व डा. हृदयनाथ कुंजरू ने, इनके सहयोग व संरक्षण में भारतीय बच्चों के लिए इलाहाबाद में सेवा समिति ब्वाय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की।
  • इनके सानिध्य में प्रत्येक कुम्भ मेले में सैकड़ों स्काउट्स सक्रिय सेवाएं प्रदान करते थे।
  • इनकी मृत्यु 12 नवम्बर 1946 को हुई।

डा. हृदयनाथ कुंजरू-

  • डॉ. हृदयनाथ कुंजरू का जन्म 1 अक्टूबर 1887 को इलाहाबाद में पं. अयोध्यानाथ कुंजरू
  • के घर में हुआ।
  • ये केन्द्रीय विधानसभा के सदस्य रहे,व बाद में राज्य सभा के सदस्य रहे । ये राज्यों की सीमा निर्धारण करने वाली समिति के भी सदस्य रहे।
  • 1918 में पं. मदन मोहन मालवीय जी के प्रयास से भारतीय बच्चों के लिए . श्रीराम बाजपेयी के साथ मिलकर सेवा समिति ब्वाय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की। ये सेवा समिति के आजीवन प्रेजिडेन्ट रहे। वर्ष 1952 से 1957 तक भारत स्काउट्स व गाइडस संस्था के प्रथम नेशनल कमिश्नर रहे।
  • इनकी स्मृति में 1987 में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया ।
  • इनकी मृत्यु 03 अप्रेल 1978 को हुई।

पं. श्री राम बाजपेयी-

  • पं. श्रीराम बाजपेयी का जन्म 11 अगस्त ।
  • 1880 को शाहजहांपुर (उ.प्र.) में श्री गयादीन बाजपेयी के घर हुआ। ये रेलवे में विभिन्न विभागों में सेवारत रहे।
  • आपदा प्रबंधन प्राथमिक सहायता व ड्रिल पर आपका एकाधिकार था।
  • एक बार वे बाजार से सामान खरीद कर लाए । सामान के कागज की पुड़िया में स्काउटिंग के बारे में पढ़ कर प्रेरित हुए और भारतीय बच्चों के लिए भारत में सर्वप्रथम 1913 में शाहजहांपुर में एक स्काउट दल खोला। . मदन मोहन मालवीय जी के निमन्त्रण पर ये 1918 में इलाहाबाद कुंभ मेले में 100 स्काउट कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। उनके सेवाकार्य पर सभी मुग्ध हो गए। 1918 में ही उन्होंने . मदन मोहन मालवीय जी के सुझाव प्रेरणा व सहयोग से डॉ.हृदयनाथ कुंजरू के साथ मिलकर भारतीय बच्चों के लिए सेवा समिति ब्वय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की।
  • बाजपेयी जी ने 1921 में इलाहाबाद रैली में बेडन पावल व लेडी बेडन पावल को आमन्त्रित किया उस रैली में झंडेवाली घटना से बी पी बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने माना कि भारतीय स्काउट्स भी अन्य देशों स्काउट्स से कम नहीं है। ये पहले भारतीय स्काउटर थे जिन्होंने गिलविल पार्क (इंग्लैंडमें स्काउट मास्टर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • इनकी मृत्यु 06 जनवरी 1955 को हुई ।

डा. (श्रीमती) एनीबीसेन्ट-

  • डॉ. (श्रीमती) एनीबीसेन्ट का जन्म 01 अक्टूबर 1847 को लन्दन में हुआ था।
  • इनके माता-पिता आयरिश थे।
  • मई 1889 में ये थियोसोफिकल की सदस्या बनी व सन् 1906 में इस सोसाइटी की अध्यक्ष बनी।
  • 16 नवम्बर 1893 को श्रीमती एनीबीसेन्ट भारत आई उन्होंने भारत को अपनी मातृभूमि माना।
  • उन्होंने श्रीमद् भगवद गीता का अंग्रेजी अनुवाद किया।
  • उन्होंने भारत की आजादी के आन्दोलन में भाग लिया और जेल भी गई। उन्होंने भारतीय संस्कृति की रक्षा व उत्थान के लिए, पुराणों को ज्ञान का अक्षय भंडार बताया तथा उनका महत्व भारतीयों को समझाया।
  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिएउन्होंने अपने 15 वर्षों से संचालित हिन्दु कॉलेज को . मदन मोहन मालवीय जी को समर्पित करके महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1915-16 में डा. ( मिसेज) ने डा. अरुणडेल के सहयोग से मद्रास में इन्डियन बॉयज स्काउट एसोसिएशन की स्थापना की तथा स्काउट दल खोले।
  • उन्होंने भारत में बच्चों के लिए स्काउटिंग के प्रचार-प्रसार में बड़ा योगदान दिया।
  • इनकी मृत्यु 1933 में हुई।

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