राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) के आधार सिद्धांत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) के आधार सिद्धांत

शैक्षिक प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इंसानों का विकास करना है – जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हो, जिसमें करूणा और सहानुभूति, साहस और लचीलापन, वैज्ञानिक चिंतन और रचनात्मक कल्पनाशक्ति, नैतिक मूल्य और आधार हों। इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादक लोगों को तैयार करना है जोकि अपने संविधान द्वारा परिकल्पित – समावेशी, और बहुलतावादी समाज के निर्माण में बेहतर तरीके से योगदान करे।

एक अच्छी शैक्षणिक संस्था वह है जिसमें प्रत्येक छात्र का स्वागत किया जाता है और उसकी देखभाल की जाती है, जहाँ एक सुरक्षित और प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण मौजूद होता है, जहाँ सभी छात्रों को सीखने के लिए विविध प्रकार के अनुभव उपलब्ध कराए जाते हैं और जहाँ सीखने के लिए अच्छे बुनियादी ढांचे और उपयुक्त संसाधन उपलब्ध हैं। ये सब हासिल करना प्रत्येक शिक्षा संस्थान का लक्ष्य होना चाहिए। तथापि, साथ ही विभिन्न संस्थानों के बीच और शिक्षा के हर स्तर पर परस्पर सहज जुड़ाव और समन्वय आवश्यक है।

मूलभूत सिद्धांत जो बड़े स्तर पर शिक्षा प्रणाली और साथ ही व्यक्तिगत संस्थानों दोनों का मार्गदर्शन करेंगे, ये हैं:

  • हर बच्चे की विशिष्ट क्षमताओं की स्वीकृति, पहचान और उनके विकास हेतु प्रयास करना – शिक्षकों और अभिभावकों को इन क्षमताओं के प्रति संवेदनशील बनाना जिससे वे बच्चे की अकादमिक और अन्य क्षमताओं में उसके सर्वांगीण विकास पर भी पूरा ध्यान दें।
  • बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान को सर्वाधिक प्राथमिकता देना – जिससे सभी बच्चे कक्षा 3 तक साक्षरता और संख्याज्ञान जैसे सीखने के मूलभूत कौशलों को हासिल कर सकें।
  • लचीलापन, ताकि शिक्षार्थियों में उनके सीखने के तौर-तरीके और कार्यक्रमों को चुनने की क्षमता हो, और इस तरह वे अपनी प्रतिभा और रुचियों के अनुसार जीवन में अपना रास्ता चुन सकें;
  • कला और विज्ञान के बीच, पाठ्यक्रम और पाठ्येतर गतिविधियों के बीच, व्यावसायिक और शैक्षणिक धाराओं, आदि के बीच कोई स्पष्ट अलगाव न हों, जिससे ज्ञान क्षेत्रों के बीच हानिकारक ऊंच-नीच और परस्पर दूरी एवं असंबद्धता को दूर किया जा सके;
  • सभी ज्ञान की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए एक बहु-विषयक दुनिया के लिए विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, मानविकी और खेल के बीच एक बहु-विषयक और समग्र शिक्षा का विकास
  • अवधारणात्मक समझ पर जोर, न कि रट॑त पद्धति और केवल परीक्षा के लिए पढ़ाई;
  • रचनात्मकता और तार्किक सोच तार्किक निर्णय लेने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए:
  • नैतिकता, मानवीय और संवैधानिक मूल्य जैसे, सहानुभूति, दूसरों के लिए सम्मान, स्वच्छता, शिष्टाचार, लोकतांत्रिक भावना, सेवा की भावना, सार्वजानिक संपत्ति के लिए सम्मान वैज्ञानिक चिंतन, स्वतंत्रता, जिम्मेदारी, बहुलतावाद, समानता और न्याय:
  • बहु-भाषिकता और अध्ययन-अध्यापन के कार्य में भाषा की शक्ति को प्रोत्साहन जीवन कौशल जैसे, आपसी संवाद, सहयोग, सामूहिक कार्य, और लचीलापन;
  • सीखने के लिए सतत मूल्यांकन पर जोर, इसके बजाय कि साल के अंत में होने वाली परीक्षा को केंद्र में रखकर शिक्षण हो जिससे कि आज की ‘कोचिंग संस्कृति को ही बढ़ावा मिलता है;
  • तकनीकी के यथासंभव उपयोग पर जोर – अध्ययन-अध्यापन कार्य में, भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने में, दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने में और शैक्षणिक नियोजन और प्रबंधन में;
  • सभी पाठ्यक्रम, शिक्षण-शास्त्र और नीति में स्थानीय संदर्भ की विविधता और स्थानीय परिवेश के लिए एक सम्मान, हमेशा ध्यान में रखते हुए कि शिक्षा एक समवर्ती विषय है;
  • सभी शैक्षिक निर्णयों की आधारशिला के रूप में पूर्ण समता और समावेशन, साथ ही शिक्षा को लोगों की पहुँच और सामर्थ्य के दायरे में रखना – यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी छात्र शिक्षा प्रणाली में सफलता हासिल कर सकें;
  • स्कूली शिक्षा से उच्चतर शिक्षा तक सभी स्तरों के शिक्षा पाठ्यक्रम में तालमेल, प्रारंभिक बाल्यवस्था देख-भाल तथा शिक्षा से;
  • शिक्षकों और संकाय को सीखने की प्रक्रिया का केंद्र मानना – उनकी भर्ती और तैयारी की उत्कृष्ट व्यवस्था, निरंतर व्यावसायिक विकास, और सकारात्मक कार्य वातावरण और सेवा की स्थिति:
  • शैक्षिक प्रणाली की अखंडता, पारदर्शिता और संसाधन कुशलता ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण के माध्यम से सुनिश्चित करने के लिए एक ‘हल्का, लेकिन प्रभावी’ नियामक ढांचा – साथ ही साथ स्वायत्तता, सुशासन, और सशक्तीकरण के माध्यम से नवाचार और आउट:
  • ऑफ-द-बॉक्स विचारों को प्रौत्साहित करना;
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकास के लिए उत्कृष्ट स्तर का शोध:
  • शैक्षिक विशेषज्ञों द्वारा निरंतर अनुसंधान और नियमित मूल्यांकन के आधार पर प्रगति की सतत समीक्षा:
  • भारतीय जड़ों और गौरव से बंधे रहना, और जहाँ प्रासंगिक लगे वहाँ भारत की समृद्ध और विविध प्राचीन और आधुनिक संस्कृति और ज्ञान प्रणालियों और परंपराओं को शामिल करना और उससे प्रेरणा पाना;
  • शिक्षा एक सार्वजनिक सेवा है; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार माना जाना चाहिए;
  • एक मजबूत, जीवंत सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में पर्याप्त निवेश – साथ ही सच्चे परोपकारी निजी और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहन और सुविधा।

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