बी .पी. के 6 व्यायाम

बी .पी. के 6 व्यायाम

बी.पी.के छ: व्यायाम के सम्बन्ध में स्काउटिंग फॉर बॉयज में बी.पी. ने स्वयं कहा है-

  1. ये व्यायाम शरीर के सभी अंगों के लिए हैं।
  2. ये बहुत धीमी गति के व्यायाम हैं इनका श्वसन क्रिया से तालमेल हो।
  3. यह सतत प्रक्रिया है जिसमें सांस लेना व छोड़ना एक छोटे विश्राम के साथ होता है।
  4. अपना स्वयं का समय लेते हुए व्यायाम करें।
.पी. के 6 व्यायाम - बी .पी. के 6 व्यायाम
बी .पी. के 6 व्यायाम

सिर, चेहरे और गर्दन का व्यायामः

सिर, चेहरे और गर्दन को कई बार जोर से दोनों हाथों की हथेलियों व अंगुलियों से मलें, गर्दन तथा गले की पेशियों को थपथपायें। अपने बालों में कंघा करें, दांत साफ करे, मुंह और नाक साफ कर एक प्याला ठण्डा पानी पीकर निम्नलिखित कसरतें करें।

सीने (छाती) का व्यायामः-

सावधान की अवस्था में आगे झुकाते हुए तथा बाजू तने हुए घुटनों की सीध में, हथेलियों का रुख बाहर की ओर कर धीरे-धीरे सांस छोड़ दें। अब सांस भरते हुए धीरे-धीरे हाथों को सिर के ऊपर लेजा कर जितना संभव हो पीछे तक ले जाऐं। हाथों का वृत्त बनाते हुए ईश्वर का धन्यवाद करते हुए धीरे-धीरे हाथ पूर्वावस्था में नीचे लाऐं। इस व्यायाम को करते समय शरीर और सांस का सामंजस्य बनाये रखकर कम से कम छः तथा अधिकतम बारह बार प्रतिदिन करें। इस व्यायाम से कंघे, छाती, हृदय तथा श्वसन-तंत्र मजबूत होते हैं।

आमाशय (पेट) का व्यायामः-

सावधान की अवस्था में खड़े होकर दोनों भुजाओं और अंगुलियों को सीने के आगे तान दें। अब पांवों को बिना हिलाये धीरे-धीरे सांस भरते हुए कमर को दाहिनी ओर इस प्रकार मोड़े कि दोनों हाथ समानान्तर स्थिति में जितना पीछे तक जा सकें ले जाएं। कुछ सेकण्ड रुक कर सांस छोड़ते हुए कमर बांयी ओर मोड़ें ताकि हाथ जितना सम्भव हो पीछे तक जा सकें। अब पुनः सांस भरते हुए दाहिनी ओर यह क्रम जारी रखें। छः बार कर चुकने के बाद क्रम बदल दें। अब बायीं ओर से प्रारम्भ कर दाहिनी ओर को क्रम जारी रखें। छः बार इसे करें। इस प्रकार दायें व बायें दोनों ओर से कुल बारह बार करें। सांस नाक से लेकर मुंह से छोड़ें। इस व्यायाम से आमाशय, जिगर (यकृत), अग्नाशय तथा अंतड़ियों की वर्जिन होती है।

कुल्हे का व्यायाम:-

सावधान की अवस्था में खड़े होकर दोनों हाथों को सिर के ऊपर जितना ऊँचा ले जाना सम्भव हो ले जाएँ तथा अंगुलियों को परस्पर मिला लें। अब थोड़ा पीछे झुककर दायीं ओर मुड़ते हुए तथा सांस छोड़ने हुए दाहिने से बायें कमर को आगे झुकायें। जब शरीर ऊपर को उठना शुरू हो तो सांस भरें और धीरे-धीरे पूर्व अवस्था में धड़ सीधा, हाथ ऊपर करें। इस प्रकार हाथों से एक वृत्त बन जायेगा। दाहिनी ओर से कम से कम तीन बार और बायें से भी तीन बार, और इस प्रकार कम से कम छः अधिकतम बारह बार करें, इस व्यायाम को कोन व्यायाम’ भी कहा जाता है।

इस व्यायाम से आंतें और कमर की माँस पेशियां सबल होती है।

शरीर के निचले भाग तथा टांगों की पिंडलियों का व्यायामः-

पांवों में थोड़ा फासला रखकर हाथों को सिर के पीछे इस प्रकार लगा लें कि सिर को हाथों का सहारा मिले। कमर से ऊपर चड़ पीछे को झुका हो ताकि चेहरा आसमान की ओर हो। सांस छोड़ते हुए हाथों को सीधा तानते हुए धड़ धीरे-धीरे आगे को झुकायें तथा हाथ की अंगुलियों से पंजे छू लें। अब साँस भर कर धीरे-धीरे पूर्वावस्था में लौट आएं। लगभग एक दर्जन बार इस अभ्यास को करें। इस व्यायाम से रीढ़ की पेशियों, आमाशय तथा पिण्डलियों की मालिश होती है।

टांग, पैर तथा पंजों का व्यायामः-

सावधान अवस्था में नंगे पांव खड़े होकर हाथों को कूल्हे पर रख साँस छोड़ते हुए पंजों पर खड़े हो कर धीरे-धीरे बैठने की स्थिति में आयें, घुटनों में फासला रखें तथा शरीर सीधा रखें। साँस लेकर धीरे-धीरे उठकर पूर्वावस्था में आवें। इसी क्रम को दोहराते लगभग 12 बार करें। इस व्यायाम से पैरों की माँस-पेशियों की वर्जिश होती है। पिडलियों तथा पंजों की नशों को सशक्त करता है। (स्काउटिंग फॉर बॉयज पेज संख्या-274)

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